भीलवाड़ा

भीलवाड़ा का कूडा-कचरा उगलने लगा सोना

अच्छी खबर यह है कि भीलवाड़ा शहर के कचरे ने अब जैविक खाद का सोना उगलना शुरू कर दिया, जी हां, यह संभव हुआ है सांगानेर स्थित कीरखेड़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड में नगर परिषद के स्थापित कंपोस्ट प्लांट के शुरू होने से। यहां प्लांट में रोजाना अभी १४० से १५० टन कचरा शहर की विभिन्न कॉलोनियों से आ रहा है। प्लांट में कचरे से निर्मित ताप निरोधक ईंटे चित्तौडग़ढ़ स्थित सीमेंट प्लांट में भी काम आने लगी है।

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Bhilwara's garbage - waste spewing gold

भीलवाड़ा। अच्छी खबर यह है कि भीलवाड़ा शहर के कचरे ने अब जैविक खाद का सोना उगलना शुरू कर दिया, जी हां, यह संभव हुआ है सांगानेर स्थित कीरखेड़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड में नगर परिषद के स्थापित कंपोस्ट प्लांट के शुरू होने से। यहां प्लांट में रोजाना अभी १४० से १५० टन कचरा शहर की विभिन्न कॉलोनियों से आ रहा है। प्लांट में कचरे से निर्मित ताप निरोधक ईंटे चित्तौडग़ढ़ स्थित सीमेंट प्लांट में भी काम आने लगी है।

एक दशक पूर्व सांगानेर स्थित कीरखेड़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड पर स्थापित कंपोस्ट प्लांट गत एक वर्ष से फिर प्रायोगिक रूप से संचालित किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केन्द्र सरकार की ओर से मिले निर्देश के बाद नगर परिषद ने अक्टूबर, 2014 में टेंडर किए भी थे लेकिन कंपनी की रेट ज्यादा होने से परिषद ने कार्यादेश जारी नहीं किए। वर्ष २०१८ में परिषद ने फिर से नए सिरे से कंपोस्ट प्लांट को संचालित करने का बीड़ा उठाया था। नए सिरे से प्लांट संचालन की हुई निविदा में दिल्ली की रोल्जे मेटेरियल कम्पनी ने रूचि दिखाई और। शहर के एकत्रित कचरे से खाद बनाने के बाद ४०१ रुपए प्रति टन के आधार पर परिषद को राशि देने की प्रांरभिक स्वीकृति जारी की। करीब पांच करोड़ की लागत से नए संयंत्र यहां प्लांट में स्थापित करने के बाद नवम्बर २०१९ से दिल्ली की कंपनी ने यहां काम करना शुरू कर दिया। एक ही वर्ष में प्लांट सोना उगलने लगा है।

पहाड़ होने लगे ध्वंस्त
यहां प्लांट शुरू नहीं होने से ट्रेंचिंग ग्राउंड की १७२ बीघा भूमि में एक दशक के भीतर जगह जगह कचरे के पहाड़ों उभर आए थे, लेकिन प्लांट शुरू होने के बाद अब जेसीबी व बुलडोजर चलने से पहाड़ ध्वंस्त होने लगे है। यहां से उठने वाली दुर्गंध भी अब कम होने लगी है।

सब्जी व प्लास्टिक का कूडा आ रहा काम
प्लांट मैनेजर राहुल बताते है कि अभी शहर की कॉलोनियों से रोजाना १३५ मैट्रिक टन से अधिक कचरा रोज यहां ट्रेंचिंग ग्राउंड पर आ रहा है। सबसे पहले उनका यहां तोल होता है। इसके बाद कचरे की छंटाई होती है। सब्जी, नारियल, फल, व घर के कूडे को अलग किया जाता है। इसी प्रकार प्लास्टिक निर्मित कचरे यानि टयूब, टायर,पानी की बोतलें, बाल्टियां, पॉलिथीन व दूध थैलियां, पेपर को अलग किया जाता है। यहां स्थापित आधुनिक मशीनों के जरिए सब्जी युक्त कचरे से जैविक खाद बनाई जाती है, जबकि आरडीएफ यानि रिफ्यूज ड्राई फ्यूल से कोल के वैकल्पिक रूप में सीमेंट प्लांट के लिए ताप निरोधक ईंटे बनाई जा रही है। किसानों के लिए खुले व पैकिंग में जैविक खाद की बिक्री भी शुरू की गई है। ताप निरोधक ईंटे चित्तौडग़ढ़ व निम्बाहेड़ा तक जाने लगी है।

ग्यारह साल बाद उत्पादन
ट्रेंचिंग ग्राउंड में लगे कंपोस्ट प्लांट का उद्घाटन तत्कालीन सांसद सीपी जोशी ने ११ अक्टूबर २००९ को किया था। प्लांट की लागत १.७५ करोड़ रुपए आई थी। इस प्लांट से प्रतिदिन ७५ टन खाद बनाने की क्षमता थी, कुछ माह तक प्लांट चलाने के बाद इसे कम्पनी ने बन्द कर दिया था। लेकिन नए प्लांट में आधुनिक संयंत्रों के स्थापित होने से इसकी उत्पादन क्षमता भी १०० मैट्रिक टन दैनिक हो गई है।
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एक्सपर्ट व्यू: शहर की सफाई, प्लांट का गुणवत्ता पर जोर,
सांगानेर स्थित कीरखेड़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड में कंपोस्ट प्लांट को प्रायोगिक रूप से शुरू कर दिया है। यहां शहर की विभिन्न कॉलोनियों से रोजाना १३५ से १५० मैट्रिक टन कचरा आ रहा है। विभिन्न प्रोसेस के जरिए कचरे को उपयोग लायक बनाया जा रहा है। यहां प्लांट पर स्थापित लैब के जरिए कचरे से तैयार उत्पादों की गुणवत्ता की भी पूरी जांच परख की जा रही है। जिस प्रकार से प्लांट से जैविक खाद एवं ताप निरोधक ईंट बनने का काम शुरू हुआ है। वो भविष्य के लिए शुभ संकेत है। कॉलोनियों से कचरे का उठाव तय समय में हो, इसके लिए संबधित एजेंसी को पाबंद कर दिया गया है। कचरे को सुरक्षित तरीके से प्लांट तक पहुंचाने के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए है।
-अखेराम बडोदिया, अधिशासी अभियंता, नगर परिषद

Published on:
20 Dec 2020 12:07 pm
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