सीकर अव्वल, चूरू दूसरे तथा भीलवाड़ा को मिला 13वां स्थान
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी अक्टूबर माह की मासिक रैंकिंग में शिक्षा व्यवस्था के मानक के आधार पर जिलेवार परिणाम सामने आए हैं। इस बार सीकर जिला प्रथम स्थान पर उभरा जबकि चूरू दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, भीलवाड़ा जिला 50 अंक प्राप्त कर 13वें पायदान पर रहा है। इससे जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस हुई है।
रैंकिंग के मुख्य तथ्य
सीकर जिले ने कुल 55 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। चूरू को 53.27 अंक मिले और वह दूसरे स्थान पर रहा। भीलवाड़ा को 50 अंक मिले, जो उसे सूची में 13वें स्थान पर ले गया। रैंकिंग में मूल्यांकन के लिए कुल 12 बिंदू निर्धारित किए गए थे। इनमें इंस्पायर अवार्ड, गार्गी पुरस्कार, स्कूलों की औसत उपस्थिति, एनएमएमएस में चयन, विद्यार्थियों में रीडिंग हैबिट विकसित करने के लिए पुस्तकों का वितरण, बोर्ड परीक्षा की रैंकिंग, अभिभावक-शिक्षक बैठक में उपस्थिति, ज्ञान संकल्प पोर्टल पर अंशदान, शाला दर्पण पर जनाधार प्रमाणीकरण, स्मार्ट कक्षाओं का संचालन तथा खेल मैदान की उपलब्धता शामिल है।
भीलवाड़ा में चिंतन की जरूरत
भीलवाड़ा जिले का 13वीं पायदान पर आना शिक्षा विभाग एवं स्कूल प्रबंधन के लिए चेतावनी संकेत है। संख्यात्मक रूप से अंक 50 रहे हैं। यह अन्य अग्रणी जिलों की तुलना में काफी पीछे है।
इस पर करना होगा काम
शिक्षा विभाग व राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद को सुझाव है कि तीन स्तर पर काम किया जाए। रैंकिंग के 12 बिंदुओं के संबंध में जिलेवार स्थिति-विश्लेषण तैयार करना। स्कूलों को आवश्यक उपकरण, संसाधन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना तथा अभिभावकों, शिक्षकों व स्थानीय प्रशासन को समन्वित रूप से सतर्क करना ताकि बच्चों की उपस्थिति, पढ़ने की आदतें और समग्र विद्यालय-परिस्थिति में सुधार हो सके।
टॉप टेन जिले
प्रदेश में प्रथम दस जिलों में सीकर, चूरू, पाली, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, कोटा, टोंक, झुंझुनूं, करौली तथा सवाई माधोपुर जिला शामिल हैं।
फिसड्डी जिलो में
अंतिम दस जिलो में बारां, सलूंबर, खैरथल-तिजारा, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा, बाड़मेर, नागौर, बांसवाड़ा, जोधपुर तथा ब्यावर जिला शामिल हैं।