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राजस्थान में नाबालिग को 6 लाख में बेचा, देह व्यापार से कमाए 12 लाख; शिकायत पर परिवार को धमकी

भीलवाड़ा। नाबालिग को 6 लाख में बेचकर जबरन देह व्यापार कराने का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि 11 मई को एसपी से गुहार लगाने के बाद भी काछोला पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपी अब परिवार को धमका रहे हैं।

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rajasthan police action

राजस्थान पुलिस की कार्रवाई

भीलवाड़ा। एक नाबालिग को कथित तौर पर 6 लाख रुपए में बेचकर देह व्यापार के दलदल में धकेलने का मामला सामने आया है। बूंदी जिले के रामनगर के दलालों ने पीड़िता को बंधक बनाकर जबरन वेश्यावृत्ति कराई और करीब 12 लाख रुपए की काली कमाई की। आरोपियों के चंगुल से भागकर लौटी पीड़िता ने आपबीती सुनाई। पीड़िता ने 11 मई को भीलवाड़ा एसपी को रामनगर (बूंदी) निवासी आरोपी सोनू, जॉनी, रुक्मणी देवी और हिना के खिलाफ परिवाद पेश किया।

पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बाद भी पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपी अब पूरे परिवार को धमका रहे है। वहीं, काछोला थानाधिकारी मालीराम के अनुसार 20 मई को मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।

क्या है मानव तस्करी की सजा?

यदि इस मामले की जांच के बाद पीड़िता ने जो आरोप लगाए हैं, वे सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। मानव तस्करी करना, नाबालिग को खरीदना-बेचना, बंधक बनाकर रखना, जबरन देह व्यापार कराना और धमकाने जैसे गंभीर अपराधों में कार्रवाई हो सकती है।

ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट और अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम ( ITPA)) जो कि भारत में मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति के व्यावसायिक शोषण को रोकने के लिए बनाया गया कानून है। इसके तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है।

कानूनी जानकारी के अनुसार, किसी भी नाबालिग को देह व्यापार में धकेलना और उसे डरा-धमकाकर जबरन वेश्यावृत्ति कराना बहुत गंभीर अपराध में आता है। अगर इसके आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होती है और उन्हें कई वर्षों के कठोर कारावास से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। कारावास के अलावा अदालत आरोपियों पर भारी जुर्माना व आर्थिक दंड भी लगा सकती है। शिकायत के बाद पीड़िता या उसके परिवार को धमकियां देने के आरोप साबित होने पर भी अलग से कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।

कानून में नाबालिगों से जुड़े अपराधों को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है। इसी कारण नाबालिगों से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई के दौरान पीड़िता की सुरक्षा के लिए, उसकी पहचान को गोपनीय रखने और उसके अधिकारों को पूरी प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, किसी भी केस का अंतिम फैसला अदालत में पेश सबूतों, जांच की रिपोर्टों और गवाहों के बयानों को आधार बनाकर ही तय होता है।

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