
कुएं में गिरी महिला बच्ची के साथ और उसे निकालने का प्रयास करते ग्रामीण (पत्रिका फोटो)
भीलवाड़ा: सामाजिक कुप्रथाओं और पारिवारिक कलह का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है। भीलवाड़ा जिले के मोड़ का निंबाहेड़ा कस्बे में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जहां आटा-साटा प्रथा (अदला-बदला) विवाह विवाद और ससुराल पक्ष की प्रताड़ना से तंग आकर एक बेबस मां ने अपनी डेढ़ वर्षीय मासूम बेटी के साथ कुएं में छलांग लगा दी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
बता दें कि गनीमत रही कि कुएं में पानी कम था और ग्रामीणों की तत्परता व सूझबूझ के कारण करीब चार घंटे चले बेहद कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मां और बेटी दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जानकारी के अनुसार, मोड़ का निंबाहेड़ा निवासी हीरालाल माली की 23 वर्षीय पुत्री मंशा अपनी डेढ़ साल की बेटी हर्षिता के साथ मंगलवार को घर से खेत की ओर निकली थी। लेकिन कुएं में छलांग लगाने से पहले मंशा ने अपने व्हाट्सएप अकाउंट पर मौत से जुड़ा एक बेहद भावुक और डरावना स्टेटस लगाया। जैसे ही परिजनों और रिश्तेदारों ने यह स्टेटस देखा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी अनहोनी की आशंका के चलते परिवार और ग्रामीणों ने तुरंत मंशा की तलाश शुरू कर दी।
खोजबीन करते हुए मंशा के पिता हीरालाल माली जब अपने खेत पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। खेत पर बने करीब 50 फीट गहरे कुएं के बाहर मंशा की चप्पलें लावारिस हालत में पड़ी हुई थीं। अनहोनी का अंदेशा गहराते ही पिता ने जोर-जोर से रोना और चिल्लाना शुरू कर दिया।
आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर इकट्ठा हुए और जब कुएं के अंदर आवाज लगाई गई, तो नीचे से मंशा की रोने की आवाज आई। कुएं के अंदर का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला था; मंशा अपनी डेढ़ साल की मासूम बेटी हर्षिता को अपने सीने से चिपकाए हुए, कुएं के भीतर निकली एक चट्टान को पकड़कर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पटवारी नारायण कुमावत और भारी संख्या में ग्रामीण रस्सियों और संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए रस्सियों के सहारे कुएं में उतरना शुरू किया। कुएं की गहराई लगभग 50 फीट थी, जिससे रेस्क्यू में काफी दिक्कतें आ रही थीं।
आखिरकार, ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के कारण करीब चार घंटे की जद्दोजहद के बाद मां-बेटी दोनों को सकुशल और जिंदा बाहर निकाल लिया गया। कुएं में पानी का स्तर कम होना इस हादसे में वरदान साबित हुआ, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बाहर निकालने के बाद दोनों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया, मासूम हर्षिता को केवल मामूली खरोंचें आई हैं।
ग्रामीणों और पीड़िता के अनुसार, मंशा का विवाह निकटवर्ती हरिपुरा गांव के निवासी रतनलाल माली के साथ हुआ था। यह शादी 'आटा-साटा' (लड़की के बदले लड़की की शादी) प्रथा के तहत हुई थी, जिसे लेकर पिछले लंबे समय से दोनों परिवारों के बीच गंभीर विवाद चल रहा था। घटना से ठीक एक दिन पहले ही इस मामले को लेकर समाज की पंचायत भी बैठी थी, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था।
मंशा का आरोप है कि पति और ससुराल वाले उसे लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे, जिसके कारण वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) और मानसिक तनाव में जी रही थी। इसी प्रताड़ना से तंग आकर उसने अपनी और अपनी फूल जैसी बच्ची की जीवनलीला समाप्त करने के लिए यह आत्मघाती कदम उठाया।
Published on:
21 May 2026 09:51 am
बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
