
बजरी खनन पर हाईकोर्ट का अब तक का सबसे सख्त फैसला (पत्रिका फोटो)
भीलवाड़ा: राजस्थान में बजरी खनन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार और निजी लीज धारकों को बड़ा झटका दिया है। न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने 93 माइनिंग लीज के ई-ऑक्शन को रद्द करने के पूर्व फैसले के खिलाफ दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की, कि राज्य सरकार के अधिकारियों का अड़ियल रवैया न्यायिक प्रक्रियाओं को धता बताने जैसा है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
निजी लीज धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल व अन्य ने दलील दी थी कि वे सफल बोलीदाता हैं और उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी हो चुका है। इसलिए उनका पक्ष सुना जाना जरूरी था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एलओआई महज एक भ्रूण में वादा है। जब तक अंतिम और बिना शर्त अनुबंध नहीं हो जाता, तब तक किसी भी बोलीदाता का कोई कानूनी या पक्का अधिकार नहीं बनता।
उच्च न्यायालय ने पाया कि 20 जनवरी 2026 को इस मामले में मुख्य फैसला सुनाया जाना था। लेकिन राज्य के खनन विभाग के अधिकारियों ने अदालत की अवहेलना करते हुए ठीक एक दिन पहले, यानी 20 जनवरी की आधी रात को ही आनन-फानन में माइनिंग लीज की स्वीकृतियां जारी कर दीं। कोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अवमाननाजनक है और कोर्ट के आदेशों को कमजोर करने का एक सोचा-समझा प्रयास है।
हाईकोर्ट ने अपने 20 जनवरी 2026 के फैसले में मार्च 2024 से शुरू की गई 93 बजरी खनन पट्टों की ई-नीलामी को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि ये नीलामियां सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की पर्यावरण और पर्यावरण बहाली से जुड़ी अनिवार्य गाइडलाइंस का उल्लंघन करके की गई थीं।
लीज धारकों का तर्क था कि छोटे भूखंडों 100 हेक्टेयर से कम पर पांच साल तक ब्लॉक खाली छोड़ने और बहाली अध्ययन की शर्त लागू नहीं होती। कोर्ट ने इस दलील को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि नियमों की निरंतरता और एकरूपता हर चरण में जरूरी है।
याचिकाएं खारिज: डॉ. बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान और अन्य सभी पक्षों की पुनर्विचार याचिकाएं खारिज।
सुप्रीम कोर्ट: राजस्थान उच्च न्यायालय का फैसला आने से पहले ही सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई है।
दोषी अफसरों पर गाज: अदालत के आदेशों को दरकिनार कर रात में लीज जारी करने वाले अफसरों पर जांच के आदेश।
Published on:
20 May 2026 11:16 am
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