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राजस्थान में 6110 खदानें बंद: ट्रांसपोर्ट और रोजगार पर संकट, सरकार ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

राजस्थान में 6 हजार 110 से ज्यादा खदानें बंद होने से खनन उद्योग गहरे संकट में है। भीलवाड़ा समेत कई जिलों में रोजगार, ट्रांसपोर्ट और निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। पर्यावरण मंजूरी, कंसेंट और बाजार मंदी बड़ी वजह बनी हैं। सरकार ने इमरजेंसी बैठक बुलाकर बंद लीज दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है।

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Shuts 6110 Mines

बंद पड़ी भीलवाड़ा की खदान (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Shuts 6110 Mines: राजस्थान के खनन उद्योग पर इन दिनों बड़ा संकट मंडरा रहा है। प्रदेश भर से मिले चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद खान विभाग के सामने बंद पड़ी खदानों को दोबारा शुरू करने की एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग की ओर से की गई समीक्षा में प्रदेश के 50 खनन कार्यालयों और 9 एसएमई सर्कलों में हजारों गैर-कार्यशील लीज चिन्हित की गई हैं, जो वर्तमान में पूरी तरह से बंद हैं।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में बंद पड़ी इन खदानों की कुल संख्या 6 हजार 110 से अधिक है। इसमें भीलवाड़ा सर्कल की 450 से अधिक खदानें शामिल हैं, जो आज चलने की स्थिति में नहीं हैं।

भीलवाड़ा के अलावा अजमेर, जोधपुर और जयपुर सर्कल में सबसे ज्यादा खदानें बंद पड़ी हैं। इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को भी चपत लग रही है।

क्या है खदान बंद होने के मुख्य कारण?

  • सीटीओ-कंसेंट का पेच: प्रदेश में 1,879 लीज ऐसी हैं, जो केवल कंसेंट टू ऑपरेट और कंसेंट लंबित होने के कारण संचालन से बाहर हैं। इसमें भीलवाड़ा की 292 खानें शामिल हैं।
  • बाजार में मंदी: 1,319 खदानें हैं, जहां सब कुछ ठीक होने के बावजूद बाजार में मांग नहीं होने से काम बंद है।
  • पर्यावरण मंजूरी में अटकाव: 554 मामलों में पर्यावरण मंजूरी लंबित होने से खनन कार्य ठप हैं। इसमें भीलवाड़ा की 64 खानें शामिल हैं।
  • अरावली क्षेत्र में सबसे बड़ा झटका: अरावली क्षेत्र में 3,890 लीज हैं। यहां खदानें बंद होने का कारण पर्यावरण प्रतिबंधों को माना जा रहा है।

मेसनरी स्टोन और ग्रेनाइट पर मार

बंद पड़ी लीजों में सबसे बुरा असर मेसनरी स्टोन पर पड़ा है। इसकी 2 हजार 184 लीज हैं। इसके अलावा भवन निर्माण और निर्यात में काम आने वाले ग्रेनाइट और क्वार्ट्ज उद्योग की लीजें भी संकट से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

रोजगार और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में संकट मंडराया

खदानों के बंद होने का सीधा असर आम जनता और प्रदेश के विकास पर दिखने लगा है। मजदूरों और स्थानीय लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। खदानों से जुड़ा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पूरी तरह पस्त हो चुका है, इससे बाजार में नकदी का संकट गहरा गया है। इसके अलावा निर्माण सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने से निर्माण गतिविधियां भी धीमी पड़ गई हैं।

सरकार की नई रणनीति: जिलों से मांगी सूचियां

इस बड़े आर्थिक संकट को देखते हुए राज्य सरकार अब बंद लीज को दोबारा शुरू करने की रणनीति पर काम कर रही है। गत दिनों खान विभाग के उच्चाधिकारियों की एक बैठक आयोजित की गई थी।

इसमें बंद खदानों को पुनः सुचारू करने के रास्तों पर चर्चा हुई। अब विभाग हर जिले से बंद पड़ी खदानों की विस्तृत सूचियां मांगी जा रही है, ताकि अड़चनों को दूर कर इन्हें जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।