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एक अफसर, एक ही समय और 2 सरकारी गाड़ियों से सफर…कौन हैं भीलवाड़ा की ADPC कल्पना शर्मा? जिनकी खुल गई पोल

भीलवाड़ा के समग्र शिक्षा विभाग में सरकारी वाहनों के उपयोग में बड़ा खेल सामने आया है। आरटीआई दस्तावेजों में एडीपीसी पर एक ही समय में दो सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल और लॉग बुक में ओवरराइटिंग के आरोप लगे हैं। सीडीईओ अरूणा गारू ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

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Bhilwara Education Department Scam ADPC Kalpana Sharma

ADPC Kalpana Sharma (Patrika Photo)

भीलवाड़ा: सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितता के कई मामले सुने होंगे, लेकिन भीलवाड़ा शिक्षा विभाग में अनोखा कारनामा सामने आया है। यहां एक ही सरकारी अधिकारी की ओर से एक ही समय अवधि में दो वाहनों का एक साथ उपयोग करना कागजों में दर्शाया गया है। इतना ही नहीं, एक ही रूट और एक ही गंतव्य तक पहुंचने के लिए दोनों गाड़ियों के किलोमीटर भी अंतर बताकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

बता दें कि यह मामला समसा कार्यालय की एडीपीसी से जुड़ा है। लॉग बुक में अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले कॉलम में भी काटा-पीटी और ओवरराइटिंग की गई है।

नियमों की धज्जियां: तकनीकी शाखा की गाड़ी पर भी कब्जा

एडीपीसी कार्यालय में अनुबंध पर दो वाहन लगे हैं। वाहन संख्या आरजे-06/टीए-2776 एडीपीसी के लिए है। वाहन संख्या आरजे-51/टीए-1069 तकनीकी शाखा के लिए आरक्षित है। लेकिन, आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार एडीपीसी कल्पना शर्मा इन दोनों ही वाहनों का उपयोग कर रही हैं।

कागजों में जादूगरी: एक ही दिन में दो जगह कैसे रहीं मैडम

दस्तावेजों के अनुसार, एडीपीसी ने एक ही तारीख और एक ही समय पर दोनों वाहनों का इस्तेमाल करना दर्शाया है, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।

निर्धारित किलोमीटर और मासिक किराया

वाहन का दायरानिर्धारित किमीमासिक किराया
एक ही जिले में संचालन2000 किमी₹33,000 से ₹36,000
एक से दूसरे जिले में संचालन2200 किमी₹37,000 से ₹38,000
अन्य स्वीकृत वाहन1500 किमी₹27,000 से ₹28,000

पहला केस 1: 18 सितंबर 2025

गाड़ी संख्या आरजे-51/टीए-1069 सुबह 7:20 बजे समसा कार्यालय से रवाना होकर भीलवाड़ा से शाहपुरा-जहाजपुर गई और 202 किलोमीटर की यात्रा कर शाम 7:41 बजे लौटी। इसी दिन गाड़ी संख्या आरजे-06/टीए -2776 इसी दिन सुबह 6:45 बजे रवाना होकर भीलवाड़ा से फूलिया कला (महात्मा गांधी स्कूल) गई और 173 किलोमीटर का सफर तय कर शाम 7:00 बजे वापस लौटी।

दूसरा केस 2: 26 सितंबर 2025

गाड़ी 1069: सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक सुभाष नगर, कलक्ट्रेट और नगर परिषद के चक्कर लगाकर 23 किलोमीटर चली। उसी दिन गाड़ी 2776: सुबह 9 बजे से शाम 6:15 बजे तक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्यालय और कलक्ट्रेट गई, लेकिन इसके किलोमीटर 35 दर्शाए गए।

लॉग बुक में 'काटा-पीटी' बढ़ा रही संदेह

आरटीआई से प्राप्त लॉग बुक की प्रतियों से साफ है कि गाड़ी चलाने की प्रविष्टियों और अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले कॉलम में एडीपीसी कल्पना शर्मा द्वारा पहले हस्ताक्षर किए गए और बाद में उन्हें काटकर ओवरराइटिंग की गई। यह कटिंग इस बात का पुख्ता सबूत है कि आंकड़ों में हेर-फेर करने की कोशिश की गई है, जो वित्तीय भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।

दस्तावेजों के अनुसार, केवल इस सरकारी बजट और किलोमीटर के कोटे को पूरा करने के लिए कागजों में फर्जी तरीके से गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं। कलक्ट्रेट जैसे छोटे रूटों पर भी जानबूझकर किलोमीटर बढ़ाकर लिखे जा रहे हैं, ताकि पूरा किराया उठाया जा सके।

फिक्स बजट का फायदा उठाने का खेल

वित्त विभाग के नियमों के अनुसार, सरकारी विभागों में अनुबंधित गाड़ियों के लिए किलोमीटर और मासिक किराए की राशि तय होती है।

इस मामले की जांच कराएंगे

एक ही दिन, एक ही समय में दो वाहन एक व्यक्ति कैसे काम में ले सकता है। यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। इसकी आज ही जानकारी मिली है, मामले की जांच करवाएंगे।
-अरूणा गारू, सीडीईओ, भीलवाड़ा

भूलवश हुए हस्ताक्षर

सिविल इंजीनियर को एसीबी द्वारा ट्रैप किए जाने के तीन महीने तक वाहन की लॉग बुक पर किसी ने हस्ताक्षर नहीं किए थे। इसके कारण अनुबंधित गाड़ी के चालक का वेतन अटक गया था।

केवल वेतन दिलाने के उद्देश्य से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भूलवश लॉग बुक पर हस्ताक्षर कर दिए थे। बाद में जब इस तकनीकी गलती का अहसास हुआ, तो उन हस्ताक्षरों को काटा गया। इस अवधि का यात्रा भत्ता नहीं उठाया है।
-कल्पना शर्मा, एडीपीसी समग्र शिक्षा

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