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मंदी और पाबंदियों को पछाड़ दुनिया में भीलवाड़ा टेक्सटाइल की धाक, 3000 करोड़ का नया निवेश

Bhilwara Textile Industry : युद्ध से उपजे वैश्विक संकट और अमेरिका के कड़े टैरिफ प्रतिबंधों के बावजूद भीलवाड़ा का टेक्सटाइल उद्योग कॉटन यार्न (सूती धागे) और डेनिम के दम पर वैश्विक बाजार में दौड़ रहा है।

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Bhilwara Textile Industry

फोटो पत्रिका नेटवर्क

Bhilwara Textile Industry : भीलवाड़ा। युद्ध से उपजे वैश्विक संकट और अमेरिका के कड़े टैरिफ प्रतिबंधों के बावजूद भीलवाड़ा का टेक्सटाइल उद्योग कॉटन यार्न (सूती धागे) और डेनिम के दम पर वैश्विक बाजार में दौड़ रहा है। मंदी के दौर में भी भीलवाड़ा की टेक्सटाइल इकाइयों ने रेकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। इसके चलते भीलवाड़ा में करीब तीन हजार करोड़ का नया निवेश होने जा रहा है। जबकि पाली, बालोतरा, जोधपुर टेक्सटाइल की हालत चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार भीलवाड़ा से कॉटन यार्न का एक्सपोर्ट 15 से 17 प्रतिशत और डेनिम कपड़े का निर्यात 10 से 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से लगातार वृद्धि कर रहा है।

ऑटोमेशन का कमाल

भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग ने आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन को अपनाया है। इसके बल पर यहां उत्पादित होने वाले सूती धागे की गुणवत्ता इतनी उच्च स्तरीय है कि विश्व का कोई भी देश इसका मुकाबला नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि बांग्लादेश के रेडीमेड वस्त्र व्यवसायी सबसे ज्यादा भीलवाड़ा के कॉटन यार्न पर निर्भर हैं। बांग्लादेश के अलावा इजिप्ट, चीन, पुर्तगाल, श्रीलंका, मोरक्को सहित कई देशों में यहां के धागे की भारी मांग है।

पाबंदियां बेअसर

भीलवाड़ा का डेनिम फैब्रिक्स अपनी मजबूती और उच्च स्तरीय डाइंग के दम पर दुनिया भर के बाजारों में छाया हुआ है। अब तक यहां का डेनिम मुख्य रूप से मेक्सिको, कोलम्बिया, ग्वाटेमाला, वेनेजुएला, इक्वाडोर, पेरू, चिली, अर्जेंटीना, ब्राजील और मेडागास्कर के बाजारों में धूम मचा रहा था। लेकिन हाल ही एक बड़ी कामयाबी यह मिली है कि अमरीका टैरिफ प्रतिबंधों के बावजूद पिछले कुछ माह से अमरीका को भी भीलवाड़ा से डेनिम फैब्रिक्स का निर्यात हो रहा है।

5 लाख नए स्पिंडल लगेंगे

वैश्विक बाजार से मिल रहे ताबड़तोड़ ऑर्डर के कारण वर्तमान क्षमता भी कम पड़ने लगी है। भीलवाड़ा की स्पिनिंग मिलें बांग्लादेश और चीन जैसे बड़े देशों की मांग की पूरी आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। वर्तमान में भीलवाड़ा की 20 स्पिनिंग इकाइयों में लगभग 16.78 लाख स्पिंडल काम कर रहे है। इनमें से 60 प्रतिशत विशेष रूप से कॉटन यार्न का उत्पादन कर रहे हैं।

विस्तार की नई योजना

मांग और आपूर्ति के इस अंतर को पाटने के लिए 5 बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने आगे कदम बढ़ाया है। ये घराने भीलवाड़ा में तीन हजार करोड़ रुपए का नया निवेश कर रहे हैं। इसके तहत 5 लाख से अधिक नए स्पिंडल लगाकर स्पिनिंग क्षमता का विस्तार किया जाएगा।

वैश्विक चुनौतियों के बाद भी बढ़ा निर्यात

भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग ने अपनी गुणवत्ता और ऑटोमेशन के दम पर वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बनाई है। मिडिल ईस्ट के तनाव और अमरीका टैरिफ जैसी वैश्विक चुनौतियों का यहां के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ा है। बढ़ती मांग को देखते हुए भीलवाड़ा की स्पिनिंग मिलें पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और नए निवेश से उत्पादन क्षमता का यह विस्तार अर्थव्यवस्था और रोजगार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

आरके जैन, महासचिव, मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

निर्यात: कॉटन यार्न डेनिम

2023- 3217 करोड़ 380 करोड़
2024 - 4085 करोड़ 530 करोड़
2025 - 5080 करोड़ 637 करोड़
2026 - 6190 करोड़ 810 करोड़

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