राजस्थान उच्च न्यायालय ने खान विभाग की मनमानी पर रोक लगाते हुए भीलवाड़ा के खान मालिकों को राहत दी है। न्यायाधीश डॉ. नुपुर भाटी की एकलपीठ ने आदेश में स्पष्ट किया है कि खान धारक (लीज होल्डर) को पूर्व सूचना दिए बिना किया गया ड्रोन सर्वे अवैध है। कोर्ट ने इस आधार पर खान विभाग […]
राजस्थान उच्च न्यायालय ने खान विभाग की मनमानी पर रोक लगाते हुए भीलवाड़ा के खान मालिकों को राहत दी है। न्यायाधीश डॉ. नुपुर भाटी की एकलपीठ ने आदेश में स्पष्ट किया है कि खान धारक (लीज होल्डर) को पूर्व सूचना दिए बिना किया गया ड्रोन सर्वे अवैध है। कोर्ट ने इस आधार पर खान विभाग की ओर से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस और वसूली की कार्रवाई को निरस्त कर दिया है।
भीलवाड़ा के माइनिंग इंजीनियर और विभाग ने 27 नवंबर 2025 को दरीबा व समोड़ी स्थित चुनाई पत्थर पर कुछ खानों का ड्रोन सर्वे करवाया था। इसके बाद विभाग ने आरोप लगाया कि खान मालिकों ने निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया है और 23 दिसंबर 2025 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए। इसके खिलाफ भेरूलाल, विराट स्टोन्स, वैभव पानगड़िया और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हिमांशु बम्ब ने पैरवी करते हुए कहा कि विभाग ने 27 नवंबर को जब ड्रोन सर्वे किया, तो खान मालिकों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। उन्हें सर्वे के दौरान साथ नहीं रखा गया, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने बाबू भाई पटेल बनाम राजस्थान सरकार मामले का हवाला दिया।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता यह साबित नहीं कर पाए कि सर्वे से पहले नोटिस दिया गया था। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 23 दिसंबर 2025 को जारी सभी नोटिस रद्द कर दिए। हालांकि, कोर्ट ने विभाग को छूट दी है कि वे कानून के मुताबिक खान मालिकों को पहले नोटिस देकर फिजिकल या ड्रोन के जरिए दोबारा सर्वे कर सकते हैं और यदि तब गड़बड़ी मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करें।
हाईकोर्ट का आदेश प्रदेश के खान मालिकों के लिए नजीर बनेगा। अब खान विभाग किसी भी लीज क्षेत्र में खान मालिक की जानकारी या उपस्थिति के बिना जासूसी की तर्ज पर ड्रोन सर्वे कर सीधे पेनल्टी नहीं थोप सकेगा। सर्वे से पहले नोटिस देना अनिवार्य होगा। खनिज विभाग भीलवाड़ा ने पहले नंदलाल कुमावत, लालूराम अहीर, देवीकंवर, रविकुमार विनायक, विराट स्टोन, तुलसीदास बहरवानी, वैभव पानगडि़या, भैरूलाल पारीक गोविंद इंफ्रावेन्यूचर इंडिया लिमिटेड को नोटिस जारी किए थे।