भीलवाड़ा

धनतेरस पर करें घर की सफाई, फिर खरीदारी

धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करे
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Updated: 31 Oct 2021, 8:33 PM IST
धनतेरस पर करें घर की सफाई, फिर खरीदारी
धनतेरस पर करें घर की सफाई, फिर खरीदारी

भीलवाड़ा।
धनतेरस हिंदू त्योहारों में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन (त्रयोदशी तिथि) को मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी दूध के सागर से प्रकट हुई थी। इसलिए त्रयोदशी तिथि पर भगवान कुबेर के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा उत्साह और भक्ति के साथ की जाती है। इस वर्ष 2 नवंबर मंगलवार को मनाया जा रहा है और पूजा का शुभ मुहूर्त ६.२२ बजे से ८.०९ बजे तक है। इस बीच, प्रदोष काल ५.३७ से शुरू होकर ८.०९ बजे तक चलेगा। यह त्योहार काफी शुभ माना जाता है, इसलिए लोग इस दिन सोने के गहने और कपड़े जैसी नई चीजें खरीदते हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि यह त्योहार कितना पवित्र है। इस दौरान कुछ खास बातों को ध्यान रखने की आवश्यकता है। इस बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 नवंबर को सुबह 11.31 से शुरू होकर 3 नवंबर को सुबह 9.02 बजे तक रहेगी।
धनतेरस पर क्या करें
- इस दिन साफ. सफाई बेहद जरूरी है। पूरे घर को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।
- कचरा नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। ऐसे में उसका निस्तारण करें।
- धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल के दौरान करनी चाहिए।
- यमदीप कर्मकांड है, परिवार में किसी भी तरह की असमय मृत्यु से बचने के लिए घर के बाहर दीया जलाना चाहिए।
- पंचांग में बताए शुभ मुहूर्त में ही सोना खरीदें।
- इस दिन घरों के बाहर रंगोली बनाए और घरों को दीयों से सजाते हैं।
धनतेरस पर क्या न करें
- मिट्टी या चांदी की मूर्तियों को शुभ माना जाता है इसलिए कांच या पीओपी की मूर्तियों की पूजा न करें।
- यह देवी लक्ष्मी के स्वागत का त्योहार है, इसलिए घर के प्रवेश द्वार पर जूते-चप्पल न रखें।
- मान्यता है कि धनतेरस के दिन न तो धन उधार लेना चाहिए और न ही उधार देना चाहिए।
- पूजा की रस्में खुशी से करनी चाहिए ताकि घर में नकारात्मक विचार न फैलाएं।
- इस दिन मांसाहारी भोजन से परहेज करें।
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धनतेरस शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त- 11.42 से 12.26 बजे
गौधूल मुहूर्त-5.05 से 05.29 शाम तक
प्रदोष काल- 5.35 से 8.14 शाम तक
ऋषभ काल- 6.18 से 8.14 तक
निशिता मुहूर्त- रात 11.१6 से 12.07 बजे तक
धनतेरस पूजा सामग्री
दीया और मोमबत्तियां, चंदन, चावल, बंगाल, तुलसी के पत्ते, पंचामृत, गिन्नी (सोने का सिक्का) फूल, बेल, कुमकुम, चंदन, पीली वस्त्र। भक्त अपनी पूजा विधि के अनुसार पूजा की आवश्यक व्यवस्था कर सकते हैं। भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं तो दूध, मक्खन, मिश्री और गंगा जल की आवश्यकता हो सकती है।

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