बैंक खुलने के बाद महिलाओं ने प्रबंध संचालक नीतू पीपाड़ा से अपरिपक्व सावधि जमाओ ( एफडी) का भुगतान दिलाने की मांग की। पीपाड़ा ने कहा कि आरबीआई ने रोक लगा रखी है, इसलिए भुगतान नहीं कर सकते। इस पर महिलाएं बिफर गई। वे रोते हुए बोली कि हम तो एक फीसदी अधिक ब्याज के चक्कर में फंस गई। अब हम लाखों रुपए का ब्याज छोड़ रहे हैं, मूलधन तो लौटा दो। प्रबंध संचालक ने मना किया तो महिलाओं ने आरबीआई अधिकारियों को सुनाना शुरू कर दिया।
महिलाओं ने कहा कि हमें गारंटी दो कि पैसा मिल जाएगा। काफी देर तक हंगामा होने पर प्रबंध संचालक पीपाड़ा ने आरबीआई अधिकारियों से कहा कि इन्हें समझाओ ना। इस पर आरबीआई अधिकारियों ने कहा कि इन्हें यह लिखकर दे दो कि अपरिपक्व एफडी का भुगतान अभी नहीं कर सकते। बाद में किया जाएगा। इस पर बैंक की प्रबंध संचालक ने मना कर दिया। उन्होंने जवाब दिया कि बाहर आदेश लगा हुआ है इसकी फोटोकॉपी सभी को दे देंगे लेकिन महिला बैंक की सील नहीं लगाएंगे। इसके बाद महिलाएं बैंक के अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए नीचे उतर गई।
कुछ भी हो एक लाख रुपए तो मिलेंगे ही
बैंक में जब महिलाएं आरबीआई अधिकारियों के समक्ष पहुंच कर रोने लगी तो अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बैंक की स्थिति अच्छी है इसलिए पैसे की दिक्कत नहीं आएगी। इस पर महिलाएं नहीं मानी तो उन्होंने कहा कि यहां जो जमाधन है उसका बीमा भी होता है। यदि ज्यादा पैसे होंगे तो भी एक लाख रुपए तक प्रत्येक खाताधारक को मिल ही जाएंगे। इसके लिए आरबीआई की गाइड लाइन भी है। किसी खाताधारक के एक लाख रुपए से कम जमा है, तो उन्हें यह राशि इसके अनुपात में मिलेगी।
सुबह से धूप में खड़ी रही महिलाएं
बैंक से जमा पूंजी पाने के लिए सुबह से कतार में लगी कई महिलाआें को शाम तक भुगतान नहीं हुआ। तेज धूप के बावजूद महिलाएं छाता लेकर खड़ी रही। अधिकतर महिलाएं अपने साथ में खाना लेकर आई क्योंकि उन्हें दिनभर रुकना था। लाइनें लगी होने से कई बार भगदड़ एवं तनातनी हुई जिन्हें पुलिसकर्मियों ने शांत किया। बैंक प्रबंधन की ओर से छाया नहीं कराने से महिलाएं बहुत परेशान हुई।
पुलिस सुरक्षा में निकले कर्मचारी
बैंक कर्मचारियों को शाम को महिलाओं ने बाहर नहीं निकलने दिया। इस पर पुलिसकर्मियों ने एक-एक कर्मचारी को बाहर निकाला। दिन में बैंक अध्यक्ष कीर्ति बोरदिया भी कार्यालय में बैठी हुई थी और महिलाओं को आश्वासन दे रही थी कि बैंक का पैसा कहीं पर नहीं जाएगा। बैंक में दिनभर अफरातफरी का माहौल होने से कर्मचारी भी परेशान हो गए।
ऋण की बड़ी फाइलें की तलब
आरबीआई से आई जांच टीम में महिला अधिकारी पारूल माथुर, उमेश दीक्षित व सीनियर अधिकारी आरपी शर्मा ने सोमवार को दिनभर बैंक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। सूत्रों के अनुसार, आरबीआई अधिकारियों ने बड़े ऋण से जुड़ी करीब 20 से ज्यादा फाइलें तलब की हैं। गौरतलब है कि बैंक में फर्जी खातों पर 75 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। मामले में भी फाइलों की गहनता से जांच की जा रही है। हालांकि आरबीबाई अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी देने से इनकार किया।
विभाग ने शुरू नहीं की जांच
महिला बैंक में हुई अनियमितताओं के संबंध में सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार अनिल काबरा ने भी बैंक को धारा 55 में नोटिस जारी कर रिकॉर्ड मांगा है। इस पर बैंक प्रबंधन ने जवाब प्रस्तुत किया है कि बैंक के दस्तावेज आरबीआई अधिकारियों के पास होने से उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है। उधर, बैंक में रिसीवर व रजिस्ट्रार लगने के संबंध में भी जांच के बाद ही निर्णय हो पाएगा।
एक करोड़ का भुगतान
बैंक ने सोमवार को एक करोड़ 4 लाख रुपए का नगद भुगतान किया। बैंक ने एक करोड़ 31 लाख रुपए के पे-ऑर्डर जारी किए। बैंक अध्यक्ष ने बताया कि चालू, बचत एवं परिपक्व सावधि जमा खातों में राशि का भुगतान किया गया। उन्होंने दावा किया कि अपरिपक्व सावधि जमा राशि के भुगतान पर लगी अस्थाई रोक को छोड़ कर शेष सभी तरह के भुगतान किए जा रहे हैं। बोरदिया ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के जांच दल को भी बैंक की तरफ से पूरा सहयोग किया जा रहा है।