जिले में संक्रमितों की संख्या 9643 हुई,लेकिन सरकारी आंकड़ों में अब भी 7674 मरीज
भीलवाड़ा।
अक्टूबर में कमजोर पड़े कोरोना ने नवम्बर में फिर अपनी रफ्तार पकड़ ली है। कोरोना के चरम समय में जितने मरीज नहीं थे, उससे ज्यादा अब आ रहे हैं, जबकि कोरोना सेम्पल की जांच भी कम हो रही है। उसके बाद भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में १०१ नए कोरोना संक्रमित सामने आए है। इसके साथ इनकी संख्या बढ़कर ९ हजार ६४३ हो गई है, जबकि सरकारी आंकड़ों में अब भी संक्रमितों की संख्या ७६७४ बताई जा रही है। यानी अब भी १९६९ की संख्या कम बताई जा रही है। वही जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या १७१ हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से जारी बुलेटिन में मात्र ३१ बताई जा रही है। जबकि आंकड़ों पर नजर डाले तो २४ अगस्त तक मात्र २ हजार कोरोना संक्रमित थे, जबकि ७ सितम्बर से लेकर २९ नवंबर तक की अवधि में पांच हजार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ गई। नवंबर माह में यह आंकड़े ९६४३ हो गए है।
सात दिन से लगातार सैकड़ा
कोरोना की दूसरी लहर के साथ ही मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। सात दिन में एक दिन को छोड़ दें तो रोज कोरोना शतक लगा रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि अब तक जितने भी संक्रमित आए हैं, उनमें से 75 प्रतिशत व्यक्ति भले ही निगेटिव हो गए हो, पर अभी भी वे साइड इफैक्ट से उबर नहीं पाए हैं। ऐसे में कोरोना पलटवार करने लगा है। गुरुवार को जिले में एक ही व्यक्ति के दुबारा संक्रमित होने की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। दुबारा संक्रमित होने का केस सामने आते ही चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग ने आमजन को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जो व्यक्ति पूर्व में संक्रमित हो चुके हैं और जिनमें दवाएं लेने के बाद एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है उनमें भी एक निश्चित अवधि के बाद दुबारा कोरोना संक्रमित होने का खतरा पैदा होने लग गया है।
पुराने मरीजों में ये तकलीफें
अधिकांश लोगों को फेफड़े से जुड़ी परेशानी, थकान, कमजोरी, खांसी, छाती में दर्द, मानसिक तनाव झेल रहे हैं। बाल झडऩे की शिकायत कॉमन है। घबराहट,नींद न आना, बेचैनी से भी परेशान हैं। एक बार कोरोना पॉजीटिव आ चुके लोग यह गलतफहमी पाल बैठे हैं कि उनमें एंटीबॉडी विकसित हो गई है, ऐसे में उन्हें दुबारा कोरोना नहीं होगा।
गंभीर रोगियों को संक्रमण का खतरा
संक्रमण और बीमारी दो अलग-अलग विषय है। संक्रमण तब होता है जब कोई वायरस हमारे अंदर चला जाता है जबकि बीमारी तब होती है जब वायरस मल्टीप्लाई होन लग जाता है। बुजुर्ग व गंभीर बीमारी से पीडि़त लोगों को दुबारा व तीन बार भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में एंटी बॉडी तैयार होगी या नहीं, यह शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। बुजुर्ग, ब्लड प्रेशर, सांस,अस्थमा, मधुमेह के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी मजबूत नही ंहोती है। ऐसे में उन्हें एंटीबॉडी के भरोसे बिल्कुल नहीं रहना चाहिए।
दुबारा संक्रमित हुए व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार
उधर, विजयसिंह पथिक नगर के सुरेश सुवालका के दूसरी बार कोरोना संक्रमित होने पर उसे सिद्धि विनायक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉ. दुष्यन्त शर्मा का कहना है कि सुरेश की तबीयत अब पहले ठीक है। उसे रेमडेसिवीर के इंजेक्शन लगाने बाद तबीयत में सुधार है। बिना ऑक्सीजन लगाए ही उसका लेबल ९७ आ रहा है। उसे ७२ घंटे के बाद होम आइसोलेशन के लिए भेज दिया जाएगा। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. घनश्याम चावला ने बताया कि सुवालका की स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट अब ठीक है।