आरजिया अनुसंधान केंद्र में ‘सतत कृषि’ पर प्रशिक्षण संपन्न, 30 प्रगतिशील किसानों ने सीखे नवाचार खेती में लगातार बढ़ रहे जोखिम को कम करने और किसानों की आय में स्थिर वृद्धि के लिए ‘फसल विविधीकरण’ समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी उद्देश्य के साथ महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के तहत बारानी कृषि […]
खेती में लगातार बढ़ रहे जोखिम को कम करने और किसानों की आय में स्थिर वृद्धि के लिए 'फसल विविधीकरण' समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी उद्देश्य के साथ महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के तहत बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र आरजिया में 'सतत कृषि एवं उन्नत फसल विविधीकरण रणनीतियां' विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। इसमें 30 प्रगतिशील किसानों ने आधुनिक खेती के गुर सीखे।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. एलके छाता ने कीट एवं रोग प्रबंधन की पर्यावरण अनुकूल तकनीकों से अवगत कराया। डॉ. रामावतार खंडेलवाल ने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन और जल संरक्षण उपायों पर जोर दिया। डॉ. खेमचंद नागर ने उन्नत कृषि तकनीकों और बीजों की नवीन किस्मों की उपयोगिता पर चर्चा की। आयोजन को सफल बनाने में तकनीकी दल के मदन लाल मरमट व नारायण सिंह झाला की सक्रिय भूमिका रही।