
माण्डल।
वस्त्रनगरी की धड़कन मेजा बांध छह दशक पुराना भले ही हो गया। इसकी मरम्मत के नाम पर छह बार भी काम नहीं हुआ। हर साल मरम्मत का ढोल पीटा जाता है। जल संसाधन विभाग बेख्याली की चादर ओढ़े हुए है। मानसून पूर्व यहां रखरखाव से ज्यादा कुछ नहीं होता। ऊंट के मुंह में जीरे के समान मिल रहे बजट से विभागीय अधिकारी भी परेशान है।
एक बार फिर बांध की मरम्मत और नहरों के रखरखाव के लिए प्रस्ताव भेजा गया। मानसून दस्तक देने को अब तक राशि नहीं मिली। एक दशक बाद वर्ष-2016 में बांध लबालब होने पर पाळ से कुछ स्थानों पर पानी रिस रहा था। बांध में लगातार आवक घटने से अधिकारियों ने ध्यान देना छोड़ दिया। सालाना फाटक पर ऑयल-ग्रीस से ज्यादा कुछ नहीं हो रहा। बांध परिसर में पार्क दुर्दशा का शिकार हो रहा है। बच्चों के झूले गायब है, पाळ पर सुरक्षा के लिए लगे एंगल गायब हो गए।
यहां तक की पाळ पर सीमेन्ट के एंगल तक क्षतिग्रस्त हो गए है। एंगल लगाकर उसकी खूबसूरती बढ़ाना दूर विभाग ने पाल पर दीवार चुनकर लोगों के आंनद ही खत्म कर दिया। वहीं बांध परिसर में बनी सड़कें खराब हो गई। उधर, बांध की सुरक्षा में 1994 तक 40 चौकीदार पहरेदारी करते थे। यह अब घटकर 7 पर सिमट गए। यहां वायरलेस सेट खराब पड़ा है। नाव भी जंग खा रही। गत वर्ष बचाव के लिए रखवाए गए रेत के कट्टे पड़े-पड़े फट गए जो अब कुछ काम के नही रहे।
छह दशक पुराना
जिले का सबसे बड़ा मेजा बांध का निर्माण 1957 में 65 लाख रुपए खर्च करके बनाया गया। 30 फीट की भराव क्षमता वाले बांध में तीन दशक पूर्व तक 42 हजार एकड़ में सिंचाई होती थी। अब यह घटकर 3 हजार एकड़ रह गई। है। बांध का पानी सिंचाई और पेयजल दोनों में काम में लिया जाता है। बांध पर अधिकतम डेढ़ फीट की चादर चल सकती है।
14 फीट पर रिजर्व
लम्बे समय से भीलवाड़ा की प्यास बुझाने में मेजा बांध का प्रमुख योगदान रहा। 14 फीट पानी पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जाता है। उसके बाद ही सिंचाई के लिए दिया जाता है। मेजा बांध की नहरों की हालत दयनीय है। जगह-जगह से नहरें टूटी हुई है।
125 एनीकट रोड़ा
मेजा बांध की राह में सवा सौ एनीकट रोड़ा बने हुए है। कोठारी नदी पर बने बांध में लगातार घटती पानी की आवक का यह प्रमुख कारण है। लड़की बांध से मेजा तक एनीकटों का निर्माण से वर्षाकाल में पानी पर्याप्त बहकर नहीं आ पाता। एनीकटों के भरने के बाद पानी रफ्तार पकड़ता है।
पेटा काश्त बना मुसीबत
मेजा बांध परिसर में पेटा काश्त के कारण चोरी हो रहा पानी जलदाय विभाग के लिए मुसीबत बना हुआ है। लोग बांध परिसर में बेधड़क मोटर लगाकर पानी चुराते है। इसके लिए जलदाय विभाग ने आवाज भी मुखर करने की कोशिश की, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
मेजा पर एक नजर
1957 बांध का निर्माण
65 लाख निर्माण में
हुए खर्च
3 हजार हैक्टेयर में होती सिंचाई
30 फीट की क्षमता
125 एनीकट कैचमेन्ट में एरिए में
भेज रखा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा में पर्यटक स्थलों को विकसित करने के लिए दस लाख रुपए की घोषणा की थी। विभाग ने प्रस्ताव बनाकर भी भेजा। बजट नहीं मिला।
सुभाष भट्ट, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग