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गारनेट माफिया से अवैध वसूली मामले में नया मोड़, गिरफ्तारी से पहले विधायक गोपीचंद के करीबी अजय ने कर डाला था बड़ा कांड

राजस्थान में गारनेट माफिया से अवैध वसूली मामले में नया मोड़ आया है। जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के करीबी अजय पांचाल ने गिरफ्तारी से पहले मोबाइल डेटा डिलीट कर दिया। मुख्य आरोपी समेत पांच को जेल भेजा गया है।

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Bhilwara garnet-mafia-case takes twist MLA Gopichand Meena aide Ajay Panchal deleted phone data before arrest

आरोपियों को रिमांड अवधि समाप्त होने पर अदालत में पेश किया गया (फोटो- पत्रिका)

भीलवाड़ा: कोटड़ी थाना क्षेत्र में 'रेत का सोना' कहे जाने वाले गारनेट के अवैध कारोबार में माफिया से वसूली करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का खास अजय पांचाल ही इस पूरे काले खेल का मुख्य किरदार था।

अब तक की जांच में सामने आया कि पांचाल को पुलिस दबिश की भनक पहले ही लग गई थी, जिसके चलते उसने पकड़े जाने से ठीक पहले अपने मोबाइल का सारा चैट डेटा डिलीट कर दिया, ताकि सबूतों को नष्ट किया जा सके।

पुलिस ने साइबर सेल की मदद से मोबाइल डेटा रिकवर करने की कोशिश की, लेकिन शातिर आरोपी पांचाल ने सावधानी से किए डेटा क्लीनिंग के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

अब पुलिस ने अजय पांचाल के जब्त मोबाइल को एफएसएल भेजने का निर्णय किया है, ताकि डिलीट किए गए महत्वपूर्ण साक्ष्य और चैट्स को दोबारा हासिल किया जा सके।

जेल भेजे गए पांचों आरोपी, दो और राडार पर

पुलिस ने शनिवार को पांचाल और उसके सहयोगी उदलियास निवासी नंद सिंह उर्फ पिंटू सिंह राजपूत, बीगोद के मोहनपुरा (मुणपुरा) निवासी नारायण गुर्जर, कोटड़ी के सालरिया खुर्द निवासी कालू गुर्जर तथा सौरभ काष्ट को रिमांड अवधि समाप्त होने पर अदालत में पेश किया।

जहां से पांचों को जेल भेज दिया गया। जांच के दौरान इस अवैध वसूली गिरोह में शामिल दो अन्य व्यक्तियों के नाम भी उजागर हुए हैं। पुलिस अब इन नए नामों की तलाश में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि पकड़े गए आरोपियों और नए संदिग्धों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी, जिससे सत्ता और पुलिस के संरक्षण वाले इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके। इसके लिए पांचाल और उसकी गैंग को दुबारा से प्रोडक्शन वारंट से रिमांड पर लेकर आमने-सामने कराया जाएगा।

विधायक से नजदीकी बनी ढाल, मोबाइल ही खोलेगा राज

इस पूरे प्रकरण में एक बार फिर सत्ता के रसूख का दुरुपयोग सामने आया है। जहाजपुर विधायक गोपीचंद के खास होने का फायदा उठाकर अजय पांचाल लंबे समय तक कानून की पकड़ से बचता रहा। मोबाइल डेटा डिलीट करना यह दर्शाता है कि उसे पुलिस के हर मूवमेंट की जानकारी पहले से थी।

अब एफएसएल की रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि वसूली का यह पैसा किन-किन बड़े हाथों तक पहुंच रहा था। कौन-कौन इस किरदार में शामिल रहा। किसके कहने पर वसूली का धंधा शुरू किया गया। माना जा रहा है कि अब तक पचास लाख से ज्यादा वसूली गारनेट माफिया से अजय पांचाल कर चुका है।