
जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का जन्मदिन मनाते अजय पांचाल (फोटो- पत्रिका)
भीलवाड़ा: कोटड़ी-जहाजपुर क्षेत्र में 'रेत का सोना' कहे जाने वाले अवैध गारनेट के काले साम्राज्य ने राजनीति और पुलिस प्रशासन की साख को पूरी तरह मटमैला कर दिया है। जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के सबसे करीबी माने जाने वाले अजय पांचाल की गिरफ्तारी ने न केवल जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया। बल्कि यह भी साफ कर दिया कि अपराध की जड़ें सत्ता की चौखट तक कितनी गहरी जमी हुई हैं।
रविवार को मामले की तपिश जयपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) तक जा पहुंची। इससे साफ जाहिर है कि अवैध वसूली का यह खेल सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है।
इस मामले में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने भी गंभीरता दिखाई। आईपीएस माधव उपाध्याय की संदिग्ध भूमिका सामने आने पर समूचे मामले की जांच अजमेर जीआरपी के पुलिस अधीक्षक को सौंप दी है।
प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला मोड़ आईपीएस और सदर पुलिस उपाधीक्षक माधव उपाध्याय के उस बयान से आया है, जिसने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। उपाध्याय ने स्वीकार किया कि अजय पांचाल को जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा ने ही उनसे मिलवाया था।
इस दौरान विधायक मीणा ने ही दावा किया था कि पांचाल अवैध गारनेट के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस का मददगार बनेगा। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या वह पुलिस का खबरी था या जहाजपुर विधायक की सरपरस्ती में चल रहे अवैध वसूली के रैकेट का 'सरगना'?
जहाजपुर विधायक की अपराधी के साथ यह 'जुगलबंदी' अब जनता के बीच तीखे सवाल खड़े कर रही है। आखिर एक जनप्रतिनिधि को ऐसे संदिग्ध चरित्र वाले व्यक्ति को पुलिस तक ले जाने की क्या जरूरत पड़ी? क्या यह कार्रवाई के नाम पर प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाने और अपना वर्चस्व कायम करने की एक सोची-समझी चाल थी?
आईपीएस माधव उपाध्याय की संदिग्ध भूमिका और उनके द्वारा दी गई सफाई ने महकमे की कार्यशैली पर कालिख पोत दी है। अगर अजय पांचाल पुलिस का मददगार था, तो वह अवैध वसूली के खेल में मुख्य किरदार कैसे बन गया?
पुलिस ने उसके इशारे पर कई कार्रवाई की। गारनेट का जखीरा भी पकड़ा, लेकिन क्या यह सब केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए था और अवैध गारनेट का काम करने वालों पर दबाव बनाया था।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो और वीडियो में साफ जाहिर हो रहा कि अजय पांचाल का संबंध विधायक गोपीचंद से नजदीकी था। विधायक के जहाजपुर में उसके घर से लेकर जयपुर में विधायक आवास तक पांचाल की पहुंच थी।
यही नहीं उसने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ माफिया में धौंस जमाने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल रखी है। हालांकि, राजस्थान पत्रिका सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट की पुष्टि नहीं करता है।
अजय पांचाल विधायक लिखी हुई लग्जरी गाड़ी का उपयोग करता था। यह गाड़ी पीरूलाल सेन के नाम परिवहन विभाग में पंजीकृत है। पांचाल की गाड़ी में विधायक मीणा भी घूमते थे। यही नहीं विधायक गोपींचद के नई गाड़ी खरीदने पर उनके बेटे के साथ पांचाल सोशल मीडिया पर नोट गिनते हुए वीडियो वायरल हो रहा है।
अजय पांचाल के कारनामे यहीं खत्म नहीं होते। वही पुलिस अफसरों का जन्म दिन मनाने के लिए केक और माला लेकर जाता था। उनके साथ जन्मदिन पार्टी के फोटो शेयर करता था। कई पुलिसकर्मियों के साथ फोटो और रील उसने बना रखी है। भीलवाड़ा में भी कई थानों के पुलिसकर्मियों से उसकी नजदीकियां थीं। वह पुलिस के नाम पर धमकाता भी था।
चारों आरोपियों में से पांचाल, पिंटू और कालू गुर्जर के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में पहले से ही अपराधिक मामले दर्ज हैं। पांचाल के खिलाफ प्रतापनगर थाने में सितंबर 2021 में कारोबार में मदद करने का झांसा दे बीस लाख रुपए वसूलने का मामला पटेलनगर के एक व्यक्ति ने दर्ज कराया था।
इसी मामले में पांचाल पर आरोप था कि उसने बीस लाख रुपए तो चुकाए नहीं वरन एक महिला स्पा संचालक की मदद से उसे झूठे मुकदमे में फंसाने और एक कथित वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए दो लाख की राशि वसूलने की भी कोशिश की।
एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव की विशेष टीम ने कोटड़ी थाना क्षेत्र में अवैध गारनेट माफिया से अवैध वसूली के मामले में शनिवार को त्वरित कार्रवाई की थी। विधायक गोपीचंद मीणा के विधायक प्रतिनिधि अजय पांचाल को लग्जरी एसयूवी समेत पकड़ा था।
इसी प्रकार नंद सिंह, नारायण गुर्जर तथा कालू गुर्जर को भी गिरफ्तार किया था। इनके खिलाफ कोटड़ी थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुर थानाप्रभारी कन्हैयालाल को मामले की जांच सौपी गई थी। चारों आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश कर रिमांड लिया जाएगा।
आमतौर पर जनप्रतिनिधि एसपी कार्यालय में आते हैं। उनके साथ कई अन्य लोग भी होते हैं। वह समस्या बताते हैं। इस पर समस्या के समाधान के लिए किसी न किसी अधिकारी को निर्देशित करते हैं। प्रभावी कार्रवाई भी होती है। अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पर मिलने वाली शिकायतों का भी सत्यापन कराया जाता है।
अवैध गारनेट के मामले में गिरफ्तार हुआ अजय पांचाल भी चार-पांच माह पहले जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के साथ आया था। उन्होंने भी कुछ समस्या रखी थी और कुछ जानकारी भी दी थी। उस वक्त सदर पुलिस उपाधीक्षक आईपीएस माधव उपाध्याय भी कक्ष में मौजूद थे।
इस पर उन्होंने ही उपाध्याय को मीणा और पांचाल की बताई जानकारी के आधार पर कार्रवाई करने को कहा। इसके उपरांत उपाध्याय ने कार्रवाई भी की। इसी मामले में अन्य लोगों की संलिप्ता की जांच की जा रही है। अपराधियों के साथ जिन पुलिस कर्मियों की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, ऐसे मामलों की शिकायतों पर जांच भी की जा रही है।
-धर्मेंद्र सिंह यादव, पुलिस अधीक्षक, भीलवाड़ा
Updated on:
06 Apr 2026 10:49 am
Published on:
06 Apr 2026 10:49 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
