प्रदेश में 1 से 15 मई तक चलेगा सेल्फ एन्यूमरेशन का दौर, 16 मई से 14 जून तक प्रगणक करेंगे घर-घर जाकर मकान सूचीकरण
भारत सरकार की आगामी जनगणना-2027 को लेकर राजस्थान में तैयारियां तेज हो गई हैं। देश में पहली बार आधुनिक और डिजिटल जनगणना की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए स्व-गणना की व्यवस्था लागू की है। राजस्थान में इसका आगाज 1 मई 2026 से होगा। इस महायज्ञ में प्रदेश को सिरमौर बनाने और डिजिटल भागीदारी का नया कीर्तिमान रचने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आदेश जारी कर प्रदेश के सभी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कार्मिकों को 1 मई को ही अपनी स्व-गणना पूरी करने का टारगेट दिया है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। जाट ने स्पष्ट कहा है कि स्व-गणना प्रक्रिया में शिक्षा विभाग के सभी अधीनस्थ कार्यालयों, विद्यालयों के अधिकारियों, कार्मिकों और समस्त शिक्षकों को 1 मई को ही अपना सेल्फ एन्यूमरेशन पूर्ण करना होगा।
निदेशालय के अनुसार नागरिक सहभागिता से होने वाली इस स्व-गणना के कई बड़े फायदे होंगे। आंकड़े सीधे नागरिकों की ओर से दर्ज किए जाएंगे। इससे त्रुटि की गुंजाइश कम होगी। घर-घर जाने वाले गणना कर्मियों का कार्यभार काफी हद तक कम हो जाएगा। यदि शिक्षक और आमजन बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लेते हैं, तो राजस्थान देश में डिजिटल जनगणना सहभागिता का एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है। शिक्षा विभाग की इस पहल को एक रोल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षकों की ओर से पहले ही दिन शत-प्रतिशत स्व-गणना करने से आमजन के बीच भी एक सकारात्मक और प्रेरक संदेश जाएगा।
भीलवाड़ा. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में विभिन्न विषयों के प्राध्यापकों (व्याख्याताओं) को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में चयनित कार्मिकों के यथास्थान कार्यग्रहण की अंतिम तिथि को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। अब ये शिक्षक 30 अप्रेल तक कार्यग्रहण कर सकेंगे। पूर्व में इसके लिए 23 अप्रेल की डेडलाइन तय की थी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने आदेश जारी किए हैं।