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Rape: न बोल सकती है, न सुन सकती है…किशोरी से दोबारा दरिंदगी, गर्भवती होने पर पता चली खौफनाक वारदात

भीलवाड़ा शहरी क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक 17 वर्षीय मूकबधिर किशोरी, जो न अपनी पीड़ा बोल सकती है और न सुन सकती है, एक बार फिर हैवानियत का शिकार हुई है।

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Bhilwara Crime Deaf and Mute Minor Raped Again Pregnant After Police Failed to Catch 2023 Accused

मूकबधिर किशोरी से फिर हुई दरिंदगी (पत्रिका फाइल फोटो)

Bhilwara Crime: भीलवाड़ा शहर से मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक 17 वर्षीय मूकबधिर किशोरी, जो न बोल सकती है और न सुन सकती है, एक बार फिर दरिंदगी का शिकार हुई है।

हैवानियत का खुलासा तब हुआ, जब किशोरी के गर्भवती होने की बात सामने आई, जिसके बाद परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

नियति की विडंबना: इंसाफ का अधूरा इंतजार

दुखद पहलू यह है कि इस मासूम के साथ यह खौफनाक मंजर पहली बार नहीं घटा है। इससे पहले दिसंबर 2023 में भी किशोरी के साथ बलात्कार की वारदात हुई थी। उस समय भी मामला दर्ज हुआ था।

लेकिन पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में नाकाम रही। पुलिस की इसी विफलता का नतीजा है कि अपराधियों के हौसले बुलंद रहे और उन्होंने दोबारा इस लाचार किशोरी को अपना शिकार बना लिया।

इशारों में बयां की खौफनाक दास्तां

पीड़िता बोल पाने में असमर्थ है, इसलिए पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती वारदात की कड़ियों को जोड़ना और अपराधी की पहचान करना है। पुलिस मूकबधिर विशेषज्ञों और परिजनों की मदद ले रही है। विशेषज्ञों के जरिए पीड़िता ने इशारों-इशारों में अपने साथ हुई उस खौफनाक वारदात की दास्तां बयां की है, जिसे सुनकर जांच अधिकारियों की रूह भी कांप उठी।

जांच में जुटी पुलिस की टीमें

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। साइबर सेल की मदद से घटनास्थल के आसपास की मोबाइल लोकेशन और टावर डंप डेटा खंगाला जा रहा है। इलाके में लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जांची जा रही है ताकि संदिग्धों की आवाजाही का पता चल सके। पुलिस पीड़िता के परिचितों और पूर्व में संदिग्ध रहे लोगों से कड़ी पूछताछ कर रही है।

वर्तमान में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है और पुलिस जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है। हालांकि, इस घटना ने स्थानीय कानून व्यवस्था और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इस बार यह 'खामोश चीखें' शासन-प्रशासन को जगा पाएंगी? यह बड़ा सवाल बना हुआ है।