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भीलवाड़ा शहर में प्रदूषण का खतरा: खुली ट्रॉलियों में ढोई जा रही कोयले की राख, राहगीरों की आंखों में उड़ रही धूल

भीलवाड़ा शहर में प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है। खुली ट्रॉलियों में कोयले की राख ढोने से उड़ती धूल राहगीरों की आंखों में जा रही है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, निजी कॉलोनी क्षेत्र में राख डाले जाने से पर्यावरण और जमीन की गुणवत्ता पर भी खतरा मंडरा रहा है।

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Bhilwara News

खुली ट्रॉलियों में ढोई जा रही कोयले की राख (पत्रिका फोटो)

Bhilwara News: भीलवाड़ा शहर के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली कोयले की राख का परिवहन अब आमजन के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। रविवार दोपहर भीलवाड़ा बाईपास पर कोयले की राख से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी तिरपाल या सुरक्षा कवर के खुलेआम दौड़ते देखा गया। इस लापरवाही के कारण पीछे चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजेदार बात यह है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कोई नंबर तक नहीं लिखे हुए थे। इससे परिवहन विभाग की बड़ी लापरवाही भी सामने नजर आती है।

बाईपास से गुजरने वाले राहगीरों ने बताया कि ट्रॉलियों में भरी राख हवा के झोंकों के साथ सीधे वाहनों के पीछे चल रहे लोगों की आंखों में जा रही है। इससे न केवल दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है, बल्कि सांस लेने में भी दिक्कत होती है। प्रत्यक्षदर्शियों को शुरुआत में यह स्लज लगा, लेकिन करीब जाकर देखने पर पुष्टि हुई कि यह प्रोसेस हाउस में उपयोग के बाद बची हुई कोयले की राख है।

पूछताछ करने पर ट्रॉली चालक ने बेबाकी से स्वीकार किया कि वह यह राख किसी प्रोसेस हाउस से उठाकर कोटा रोड स्थित एक निजी कॉलोनी में डालने जा रहा है। औद्योगिक कचरे का इस तरह रिहायशी इलाकों के करीब भराव करना गंभीर चिंता का विषय है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा

कोयले की राख को जमीन पर खुला छोड़ना या भराव के रूप में इस्तेमाल करना पर्यावरण के लिए खतरनाक है। इसमें आर्सेनिक, बोरॉन, कोबाल्ट, लिथियम, पारा और रेडियम जैसे जानलेवा प्रदूषक तत्व मौजूद होते हैं। बारिश या नमी के संपर्क में आते ही ये जहरीले तत्व रिसकर भूजल में मिल जाते हैं।

इससे पानी प्रदूषित हो जाता है। राख का भराव वाले क्षेत्रों में खेलने वाले बच्चे मिट्टी के माध्यम से अनजाने में ही इन भारी धातुओं (हैवी मेटल्स) का सेवन कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

शहर के बाईपास जैसे व्यस्त मार्गों पर नियमों को ताक पर रखकर इस तरह जहरीली राख का परिवहन किया जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। नियम के अनुसार, कोयले की राख या किसी भी प्रकार के पाउडरनुमा डस्ट का परिवहन पूरी तरह तिरपाल लगाकर किया जाना अनिवार्य है, ताकि धूल न उड़े। बावजूद इसके, संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

यूआईटी ने बजरी के ढेर लगा कर रोकी राह

भीलवाड़ा शहर के आरसी व्यास नगर में दधीचि सर्किल पर एमआईएल सेक्टर रोड की राह नगर विकास न्यास ने रोक रखी है। नगर विकास न्यास ने यहां निर्माण कार्य को लेकर रोड के बीच में बजरी के ढेर लगा रखे हैं। इससे आवाजाही बाधित हो रही है। हालांकि, निर्माण कार्य पर न्यायालय की रोक है।

न्यास को शिकायत किए जाने के बावजूद यहां से बजरी के ढेर नहीं हटाए जा रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि बजरी पर प्रतिबंध के बावजूद न्यास के निर्माण कार्य को लेकर ढेर लगे हुए हैं। राहगीरों की पीड़ा है कि बजरी के ढेर से जहां दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं, आवारा श्वान भी डेरा डाले रहते हैं। इससे राहगीर भयभीत रहते हैं।

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