प्रवेशोत्सव अभियान: 3 से 18 वर्ष के शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन और ठहराव सुनिश्चित करने के निर्देश, कार्य को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता, आज तक का अल्टीमेटम
राजस्थान में अब 3 से 18 वर्ष तक का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रवेशोत्सव अभियान के तहत चिन्हित आउट ऑफ स्कूल ड्रॉपआउट और अनामांकित बालक-बालिकाओं को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी करते हुए 29 अप्रेल तक इन सभी बच्चों का नामांकन नजदीकी आंगनबाड़ी या विद्यालय में सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम दिया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सिर्फ स्कूल लाना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका शत-प्रतिशत ठहराव सुनिश्चित करना भी विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीलवाड़ा जिले में कुल विद्यालय से बाहर के बच्चे 15 हजार 11 को चिन्हित किया। इसमें से अब तक शिक्षा की मुख्य धारा से 9106 बच्चों को जोड़ा गया है।
विभाग ने नामांकन के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीधे तौर पर शिक्षकों की जिम्मेदारी तय कर दी है। आदेश में स्पष्ट किया कि पूर्व में चलाए सघन प्रवेशोत्सव अभियान के दौरान पीईईओ और यूसीईईओ के अधीन जिन शिक्षकों व कार्मिकों ने घर-घर जाकर हाउस होल्ड सर्वे किया था और इन बच्चों को चिन्हित किया था, अब उन्हीं शिक्षकों को दायित्वबद्ध किया जाएगा। उन्हीं की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने द्वारा चिन्हित किए गए सभी बच्चों का बुधवार तक हर हाल में नामांकन करवाएं।
गौरतलब है कि शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में आउट ऑफ स्कूल और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान के लिए चार चरणों में एक वृहद सघन प्रवेशोत्सव अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत घर-घर जाकर यह पता लगाया गया था कि कितने बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। अब इन सभी चिन्हित बच्चों को उनकी आयु और योग्यता के अनुरूप उचित कक्षा में प्रवेश देकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा।