ईरान पोर्ट पर फंसा माल, सप्लाई चेन टूटने से भीलवाड़ा में मेवा और जड़ी-बूटियों का बिगड़ा बजट
अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब आम आदमी की सेहत और जेब पर पड़ने लगा है। खाड़ी देशों, ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले ड्राइ फ्रूट्स और जड़ी-बूटियों की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते भीलवाड़ा के बाजारों में इनके दाम आसमान छूने लगे हैं। काजू में तंजानिया-अफ्रीका से कम आवक के कारण हल्का उछाल है, वहीं सीड्स और अन्य आयातित मसालों में तेजी की संभावना है।
हालात यह हैं कि प्रीमियम क्वालिटी का मामरा बादाम और पिस्ता के भाव में भारी उछाल आया है। व्यापारियों के अनुसार, ईरान के बंदरगाहों पर बड़ी मात्रा में माल फंस गया है। सामान्य परिस्थितियों में ईरान से भारत तक माल पहुंचने में ही करीब तीन महीने लग जाते हैं। अब पोर्ट पर जहाजों की आवाजाही रुकने से बाजार में स्टॉक कम होने लगा है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आगामी त्योहारी सीजन और शादियों के सावे में आमजन को यह महंगाई और ज्यादा रुलाएगी।
अफगानिस्तान से आने वाले मेवे पहले पाकिस्तान बॉर्डर के रास्ते भारत आते थे। लेकिन सीमा बंद होने के कारण अब वहां का माल (अंजीर, मुनक्का, किशमिश, शाहजीरा, अनारदाना और मुलेठी) भी ईरान के रास्ते ही आ रहा है। ईरान में संकट के चलते यह पूरा रूट ही बाधित हो गया है। इससे सप्लाई ठप है।
केवल ड्राइ फ्रूट्स ही नहीं, ईरान से आने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों के दामों में भी तेजी दर्ज की गई है। आयुर्वेदिक औषधियों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले ईरानी सालम पंजा, सालम मिश्री और सालम गट्टा के भाव उछल गए हैं।
अभी लगभग हर आयातित ड्राइ फ्रूट और जड़ी-बूटी में तेजी है। ईरान से आने वाला काफी माल वहां के पोर्ट पर अटका हुआ है। अगर यह अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो बाजार में स्टॉक खत्म होने पर कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
- महावीर समदानी, किराना व्यापारी