भीलवाड़ा

धरती पुत्र तरसे खाद को, समितियों तरसी बाकियात को

Earth's sons yearn for fertilizer, committees yearned for Bakiyat नरेन्द्र वर्मा, भीलवाड़ा। प्रदेश में धरती पुत्र उन्नत फसल के लिए डीएपी खाद के लिए तरस रहा है। खाद का संकट होने से जिले में भी क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के स्टोर खाली पड़े है। क्यूंकि इफको की भी सहकारी समितियों में बाकियात बढ़कर करीब 80 लाख होने से खाद एजेंसी भी अब और उधार देने से कतरा रही है।

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Earth's sons yearn for fertilizer, committees yearned for Bakiyat

Earth's sons yearn for fertilizer, committees yearned for Bakiyat भीलवाड़ा। प्रदेश में धरती पुत्र उन्नत फसल के लिए डीएपी खाद के लिए तरस रहा है। खाद का संकट होने से जिले में भी क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के स्टोर खाली पड़े है। खेतों में रबी की बुवाई शुरू होने से लगातार डीएपी खाद की मांग बढऩे से इफको भी मांग के अनुरूप किसानों की मदद नहीं कर पा रहा है, क्यूंकि इफको की भी सहकारी समितियों में बाकियात बढ़कर करीब ८० लाख होने से खाद एजेंसी भी अब और उधार देने से कतरा रही है।

प्रदेश में गत पखवाड़ा हुई बारिश ने किसानों के चेहरे खिला दिए, जिन किसानों को गेहूं, चना, सरसो आदि रबी की कृषि जिंस की बुवाई में देरी हुई थी, वह भी खेतों में बुवाई में जुट गए। लेकिन संकट के हालात यह है कि जिले में मांग के अनुरूप फसल को उन्नत एवं जमीन को उपजाऊ बनाए रखने वाला डीएपी खाद ही नहीं है। ऐसे में कृषि विभाग ने डीएपी खाद के विकल्प तलाशने की सलाह दी है, लेकिन जिले का किसान विकल्प के बजाए डीएपी के खाद का ही इंतजार कर रहा है। यह खाद सिंगल सुपर फ ास्फेट की तुलना में सस्ता है।

सरसो व चने की अच्छी बुवाई

जिले में वर्ष २०२०-२१ में रबी की बुवाई का कुल लक्ष्य दो लाख ३४ हजार ८८१ हैक्टेयर क्षेत्र है। इसमें सर्वाधिक गेहूं का बुवाई क्षेत्र एक लाख हैक्टेयर है, गेहूं की बुवाई अब शुरू होनी है। सरसो की बुवाई का लक्ष्य १९९११ हजार हैक्टेयर क्षेत्र है और अभी तक दस हजार हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। चने का बुवाई क्षेत्र ५७८३९ हैक्टेयर है, अभी सात हजार हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। जिले में रबी की फ सल के लिए 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की आवश्यकता होती है, जबकि इस बार तीन हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद ही उपलब्ध था, वह भी अब स्टॉक में नाम मात्र का है।

मांगी तीन रेक, आई एक रेक
जिले में सभी ग्यारह क्रय विक्रय सहकारी समिति तथा सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों में अभी डीएपी का आंशिक स्टॉक है, तीन रैक खाद की मांगी गई, लेकिन सोमवार को खाद की एक ही रैक आई, उसमें भी पर्याप्त खाद नहीं। यह खाद भी ऑन लाइन बुकिंग आधार पर दिया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की भर्ती के कारण इंटरनेट सेवा बंद होने से बुकिंग प्रभावित हुई है।

काश्तकारो के हाल बुरे
जिले में काश्तकारों का हाल बुरे है, डीएपी की हालत यह है कि अभी गेहूं की बुवाई का सीजन आ रहा है, लेकिन समूचे प्रदेश में डीएपी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है है,, अगर समय पर किसानों को डीएपी खाद नहीं मिला तो जिस प्रकार से खरीफ की फसल खराब हुई है, वैसे भी रबी में भी नुकसान की संभावना है, सरकार को चाहिए की किसान उवर्रकों की आपूर्ति मांग के अनुरूप करें।
विठ्ठलशंकर अवस्थी, विधायक, भीलवाड़ा

सिंगल सुपर फास्फेट का विकल्प खुला
जिले में खेतों में रबी की बुवाई शुरू हो चुकी है। डीएपी खाद की कमी है, ऐसे में अच्छी फसल के लिए विकल्प तलाशने होंगे। सिंगल सुपर फ ास्फेट ही एक अच्छा विकल्प है। डीएपी के एक बैग की जगह तीन सिंगल सुपर फ ास्फेट व एक यूरिया का बैग मिलाकर जमीन में छिड़काव कर सकते हैं, इससे जमीन में तमाम पोषक तत्वों की पूर्ति हो जाएगी, नौ हजार मैट्रिक टन सिंगल सुपर फ ास्फेट उपलब्ध था, जिसमें से चार हजार मीट्रिक टन सिंगल सुपर फ ास्फेट वितरण हो चुका है।
रामपाल खटीक, संयुक्त निदेशक, कृषि

समितियां नहीं चुका रही लाखों की बाकियात
डीएपी की कमी समूचे प्रदेश में कमी है। जिले में रबी की बुवाई के लिए कम से कम बारह हजार टन की जरूरत है, जिले का अभी कुल तीन हजार टन ही मिला है। बारिश होने से डीएपी खाद की मांग कही अधिक बढ़ गई है। इससे बुवाई क्षेत्र भी बढेगा। डीएपी के विकल्प के रूप में यूरिया की सलाह दी गई है, लेकिन यूरिया की भी कमी है। ग्राम सेवा सहाकर समितियों के पास भी स्टॉक नहीं है, समितियों में भी अभी इफको का करीब ८० लाख रुपए की बाकियात है,यह पैसा नहीं मिलने से इफको भी संबंधित एजेंसी को समय पर भुगतान नहीं कर पा रहा है, इससे भी समय पर खाद की रैक नहीं मिल पा रही है। गत वर्ष के मुकाबला इस बार एक लाख बीस हजार कट्टे डीएपी के कम कम आए है।
बीएल कुमावत, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक इफको, भीलवाड़ा

किसानों की ङ्क्षचता बढऩे लगी है
जिले में सरसो व चने की बुवाई पचास फीसदी से अधिक हो चुकी है, दीपावली बाद समूचे जिले में गेहूं की बुवाई शुरू हो जाएगी, बारिश शुरू होने से खेतों में स्वत: पहली पिलाई हो गई, ऐसे में बुवाई के साथ डीएपी खाद डाल दिया जाता तो अच्छी फसल उठती, लेकिन जिले में डीएपी के साथ ही एनपीके खाद की सप्लाई ग्राम सेवा सहकार समितियों के जरिए अभी तक मांग के अनुरूप नहीं हो सकी है, इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
रामकुमार जाट, जिला युवा प्रमुख, भारतीय किसान संघ, भीलवाड़ा

Published on:
29 Oct 2021 06:14 pm
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