भीलवाड़ा

प्रदेश में बिजली की दरें अन्य राज्यों से अधिक, राजस्थान में टेक्सटाइल नीति में बदलाव जरूरी

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Electricity rates in state more than other states
Electricity rates in state more than other states

भीलवाड़ा।

टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अब औद्योगिक संगठन भी प्रदेश की टेक्सटाइल नीति में बदलाव की मांग करने लगे हैं। उद्यमियों का मानना है कि वर्तमान में चल रही टेक्सटाइल नीति से उद्यमियों को लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि पहले से ही उद्योगों पर बिजली की मार पड़ रही है। इससे उलट महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश में बिजली दरों में राहत दी जा रही है।

इन राज्यों में मिल रही यह सुविधा

महाराष्ट्र में 2023 तक नई टेक्सटाइल नीति जारी है। वीविंग व स्पिनिंग को 25 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी, प्रोसेसिंग, रेडिमेड व स्पिनिंग उद्योग को 40 प्रतिशत व कंपोजिट यूनिट पर 35 प्रतिशत सब्सिडी घोषित की है। विदर्भ, मराठवाड़ा व उत्तरी भारत महाराष्ट्र में अतिरिक्त 10 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी दी जाती है। बिजली की दरों में छूट है, जबकि राजस्थान में नहीं है।


गुजरात की टेक्सटाइल पॉलिसी सितंबर 2018 तक लागू है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बिजली बिल में सब्सिडी दी जाती है। पांच प्रतिशत इंट्रेस्ट सब्सिडी, टेक्निकल टेक्सटाइल पर छह और कॉटन स्पिनिंग व अन्य पर 7 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। 2.5 प्रतिशत की दर से एसजीएसटी में वैट सब्सिडी समायोजित होती है।

मध्यप्रदेश सरकार ने भीलवाड़ा से 120 किलोमीटर दूर नीमच, मंदसौर नेशनल हाइवे पर डेनिम उद्योग के लिए भूमि एवं अन्य सहायता देने की घोषणा की है। यहां दूसरे राज्य से डेनिम में निवेश करने वाले उद्योगों की खास मॉनिटरिंग होती है। पंजाब व तमिलनाडु में भी औद्योगिक बिजली दरों में छूट दी जा रही है।

नीति में बदलाव जरूरी

टेक्सटाइल नीति में बदलाव जरूरी है। इसे लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अन्य राज्यों की तरह टेक्सटाइल उद्योगों को सुविधाएं देने की मांग की गई है। सन् 2017 तक आरआर टफ स्कीम में केंद्र सरकार वीविंग उद्योगों को 15 प्रतिशत कैपिटल व 6 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देती थी। जब से ए टफ स्कीम लागू हुई, उसमें 10 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी ही मिल रही है। ब्याज सब्सिडी समाप्त कर दी गई। जीएसटी लागू होने के बाद टेक्सटाइल उद्योग में ठहराव आ गया है।

रामेश्वर काबरा, कार्यकारी अध्यक्ष, भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन

पिछड़ रहा राजस्थान

रिप्स 2014 में पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के साथ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 50 प्रतिशत छूट, वैट पर 60 प्रतिशत का रिफण्ड का प्रावधान था। 25 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश पर 6 प्रतिशत सब्सिडी और टेक्निकल टेक्सटाइल पर 7 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही थी। बिजली की दरें ज्यादा होने और ए टफ लागू होने के बाद अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान पिछड़ रहा है।

प्रेमस्वरूप गर्ग, सचिव, भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन

Published on:
19 Aug 2018 01:37 am