मुख्य प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आने-जाने के लिए यात्री सुविधा को लगाई एस्केेलेटर आए दिन बंद रहती है
भीलवाड़ा।
रेलवे स्टेशन पर मुख्य प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर आने-जाने के लिए यात्री सुविधा को लगाई स्वचालित सीढियां (एस्केेलेटर) आए दिन बंद रहती है। सांसद कोष से लाखों रुपए खर्च कर बनाई यह सीढि़या एक माह से कभी बंद तो कभी चालू रहती है। इसके बंद रहने पर पुल पार कर दूसरे प्लेटफार्म पर जाना पड़ता है। लिहाजा शारीरिक रूप से असक्षम , वृद्धजन व दिव्यांगों को ज्यादा परेशानी होती है।
कई बार लोग पुल की सीढि़यां चढऩे के बजाय सीधे पटरी पार कर दूसरी ओर जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। शनिवार रात भी एस्कलेटर बंद था और लोग पटरी पार कर प्लेटफार्म बदल रहे थे। हालांकि नियम है कि यह बिजली चलित सीढि़यां हमेशा चले।
सताता है अचानक चालू होने का डर
कई बार बंद के दौरान यात्री इस भय से उपयोग नहीं करते कि कहीं सीढियां चालू हो जाएं तो वे गिर न जाए। कई यात्री तो भय के मारे उपयोग हीं नहीं करते है। ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश यात्री महिलाएं तो आज भी दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए पटरियां पार करती नजर आते है।
यात्रियों ने पत्रिका को बताई पड़ी
हर एक पखवाड़े में दौसा से भीलवाड़ा आता-जाता हूं। जब भी भीलवाड़ा आया यहां स्वचालित सीढियां बंद ही मिली। सीढियों के बंद होने से इस पर चढ़कर ही जाना-आना पड़ता है। पिछलें एक माह से यही होता आ रहा है।
लखन गुर्जर, दौसा
महीने-डेढ़ महीने पहले तो यह चालू रहती थी। इन दिनों जब भी स्टेशन पहुंचा तब स्वचालित सीढियां बंद पड़ी मिली। हम तो युवा है चढ़-उतर सकते है लेकिन बुजुर्गो व दिव्यांगों को कई बार परेशान होते देखा है।
समयसिंह, बांदीकुई
माह में दो से तीन बार भीलवाड़ा आना-जाना होता है। पहली बार आया तो स्वचालित सीढि़यों का प्रयोग किया, लेकिन उसके बाद तीन-चार बार आ गया। रेलवे ने हमेशा इसे बंद ही रखा है।
दिलकुश गुर्जर, यात्री
यह कहते है जिम्मेदार
में एक सप्ताह से जयपुर हूं। कर्मचारी नहीं होने से एस्केेलेटर बंद हो सकता है। पता करवाता हूं।
अनवर अली खान, स्टेशन अधीक्षक, भीलवाड़ा