भीलवाड़ा

24 साल से अपनी बेटी के लिए यह काम कर रहे पिता, हर कोई करता है सलाम

patrika.com/rajsthan news
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Updated: 21 Jun 2020, 6:54 PM IST
24 साल से अपनी बेटी के लिए यह काम कर रहे पिता, हर कोई करता है सलाम
24 साल से अपनी बेटी के लिए यह काम कर रहे पिता, हर कोई करता है सलाम

जसराज ओझा भीलवाड़ा. ये कहानी है एक एेसे पिता के संघर्ष की जिन्होंने अपनी बेटी का दर्द देखा तो दूसरों के लिए मददगार बन गए। आरके कॉलोनी स्थित जैन मंदिर के पास रहने वाले प्रेमचंद जैन की बेटी सोना जैन दिव्यांग है। वे सुन-बोल नहीं सकती है। वर्ष १९९६ की बात है। जब डॉक्टरों ने पिता प्रेमचंद जैन को यह बात बताई कि अब सोना उपचार से ठीक नहीं हो सकती है। इसके लिए प्रशिक्षण की ही आवश्यकता रहेगी। यह सुन, जैन ने हार नहीं मानी और एक संस्था खोलने का बनाया। इसके बाद कुवाड़ा रोड पर अपनी बेटी सोना के नाम से सोना मंदबुद्धि विद्यालय खोल दिया। इसमें अपनी बेटी के साथ ही कुछ और एेसे बच्चों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें भी प्रवेश दिया। इस संस्था का नाम बाद में सोना मनोविकास केंद्र रखा। जैन बताते हैं कि वर्ष १९९६ में यह संस्था खोली। इसमें बोल-सुन नहीं सकने वाले व मानसिक दिव्यांग बच्चों को रखा जाता है। इनको इनके मानसिक स्तर के हिसाब से कक्षा में प्रवेश दिया जाता है। अब तक इस संस्था से ५०० से ज्यादा बच्चे निकल चुके हैं। जैन ने बताया कि उनकी बेटी सोना अब ३७ साल की हो चुकी है। वे रोजाना सोना मनोविकास केंद्र में जाती है। जैन ने बताया कि वे खुद, रोजाना इस संस्था में जाकर पूरी व्यवस्थाएं देख रहे हैं। संस्था में दिव्यांग मानसिक बच्चों के खेलकू द के साथ ही सांस्कृतिक व विभिन्न तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। खास बात है कि सोना मनोविकास केंद्र के बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित खेल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस केंद्र को सरकारी सहायता भी मिल रही है और भामाशाह भी मदद कर रहे हैं। इसे वर्तमान में जनसहयोग से संचालित किया जा रहा है।

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21 Jun 2020, 6:54 PM IST
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