
पुलिस की गिरफ्त में Re-NEET का फर्जी पेपर तैयार करने वाला आकाश चौधरी। फोटो: पत्रिका
Fake Re-NEET Paper: भीलवाड़ा। देश की सबसे संवेदनशील परीक्षाओं में से एक 'री-नीट' को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसे युवक को पकड़ा जो टेलीग्राम पर बोगस (फर्जी) पेपर तैयार कर उसे धड़ल्ले से बेच रहा था। गुरुवार रात इस खेल का खुलासा होने के बाद, शुक्रवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी आकाश चौधरी के एक नाबालिग साथी (बाल अपचारी) को भी डिटेन कर लिया है। यह नाबालिग साथी मुख्य आरोपी के टेलीग्राम ग्रुप को हँडल करने और नए सदस्य जोड़ने में उसकी मदद करता था।
वहीं, न्यायालय ने मुख्य आरोपी आकाश चौधरी को 22 जून तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। वहीं पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने मामले की जांच सदर पुलिस उपाधीक्षक नेमीचंद चौधरी को सौंपी है। लेकिन हाल ही में जब नीट परीक्षा के पेपर लीक होने और परीक्षा निरस्त होने का देशव्यापी मुद्दा गरमाया, तो आकाश के मन में एक शातिराना आइडिया आया। उसने गूगल पर नीट परीक्षा की नोटबुक और संभावित सवालों को खंगालना शुरू किया।
स्टडी मटेरियल हाथ लगते ही उसके मन में रातों-रात अमीर बनने का लालच जाग गया। उसने खुद ही कुछ सवालों को जोड़कर एक फर्जी पेपर तैयार कर लिया। इसके बाद उसने टेलीग्राम पर एक ग्रुप बनाया और उसका नाम बेहद बेखौफ अंदाज में 'पेपर माफिया' रख दिया। इस ग्रुप में उसने कोचिंग कर रहे छात्रों सहित कुल 54 सदस्यों को जोड़ लिया। आरोपी ने राज्य के बाहर के भी कुछ छात्रों को ग्रुप से जोड़ रखा था।
आरोपी आकाश के पकड़े जाने के बाद परिजन सदमे में है। उन्हें तो पूरा माजरा ही समझ में नहीं आ रहा है। उनका मानना है कि यह सब आकाश की नादानी के कारण हुआ है। उसकी मंशा किसी अपराध को अंजाम देने की नहीं थी। वह मेधावी छात्र है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है।
आकाश ने इस बोगस पेपर को बेचने के लिए बकायदा सौदेबाजी शुरू कर दी थी। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि ग्रुप के 54 सदस्यों में से 7 लोगों ने यह फर्जी पेपर खरीदा भी था। इससे उसने करीब 18 हजार की कमाई की। आकाश ने इसके बदले एक छात्र से सबसे ज्यादा चार हजार रुपए वसूले, जबकि बाकी खरीदारों से दो से तीन हजार रुपए ऐंठे। यह पूरा खेल मोबाइल पर ही गूगल और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से रचा गया था।
केंद्र सरकार ने आगामी आदेश तक री-नीट परीक्षा को स्थगित कर दिया, तब भी आकाश का हौसला कम नहीं हुआ। उसने अपनी पहचान छुपाने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) के जरिए यूएस (अमेरिका) का नेटवर्क एक्टिव किया और टेलीग्राम ग्रुप को चलाता रहा। लेकिन उसकी यही चालाकी और ग्रुप का नाम 'पेपर माफिया' रखना पुलिस के खुफिया तंत्र की नजरों में आ गया, जिसके बाद पुलिस ने गुरुवार रात पटेलनगर में जाल बिछाकर उसे दबोच लिया। पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से दो मोबाइल, बैंक पासबुक और नीट की नोटबुक बरामद की है, जिससे इस पूरे फर्जीवाड़े की कड़ियां जोडी जा रही हैं।
सदर पुलिस उपाधीक्षक चौधरी ने बताया कि भीलवाड़ा के पटेलनगर में रहने वाला 19 वर्षीय आकाश चौधरी मूल रूप से चूरू जिले का रहने वाला है। उसका परिवार पिछले 25 सालों से भीलवाड़ा में ही बसा हुआ है और उसके पिता रीको क्षेत्र में काम करते हैं। आकाश खुद एयरफोर्स में भर्ती होने का सपना देख रहा था और उसकी तैयारी में जुटा था।
Updated on:
20 Jun 2026 10:01 am
Published on:
20 Jun 2026 08:41 am
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