
- अजीबोगरीब नामों का दंश झेल रहे सूबे के कई गांव, नाम बताने पर लोग उड़ाते हैं खिल्ली
- गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया काफी लम्बी और पेचिदा
चित्तौडगढ़़. भाई सा...आपका गांव कौन सा है। यह सवाल सुनते ही प्रदेश के दर्जनों गांवों के लोग संकोच में पड़ जाते हैं। कारण, गांवों के ऐसे अटपटे और अजीबो-गरीब नाम, जिन्हें सार्वजनिक रूप से बताने में ग्रामीणों को खासी हिचकिचाहट और कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
बोलचाल के दौरान जब भी कोई इन गांवों के नाम सुनता है, तो चेहरे पर तंजिया मुस्कान आ जाती है। कई बार लोग फब्तियां कसने और खिल्ली उड़ाने से भी बाज नहीं आते। रिश्तेदारों के सामने शर्मिंदगी और युवाओं को शादी-ब्याह के रिश्तों में आ रही व्यावहारिक परेशानियों के चलते अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। स्थिति यह है कि कागजी दस्तावेजों, पहचान पत्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपने ही गांव का नाम लिखना लोगों को अखरता है। हालांकि प्रदेश में ऐसे कई गांवों में नामों को बदलवाने की कवायद की जा रही है। गांव का नाम बदलवाने के नियमों में काफी पेचदगियां है। राजस्थान पत्रिका की टीम ने जानें चित्तौडगढ़़ जिले सहित प्रदेश के कई जिलों के अटपटे गांवों के नाम।
\Bनाम बदलवाने की यह होती प्रक्रिया
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गांव का नाम बदलवाने के लिए गांव के लोगों को मिलकर ग्राम पंचायत में एक लिखित आवेदन देना होता है। ग्राम सभा की बैठक बुलाई जाती है और बहुमत से नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया जाता है। इस प्रस्ताव को जिले के राजस्व अधिकारी या जिला कलक्टर के पास भेजा जाता है। कलक्टर इस आवेदन और ग्रामीणों की मांग को अपनी संस्तुति के साथ राज्य सरकार के पास भेजते हैं। सरकार प्रस्ताव की जांच करती है। अगर सरकार सहमत होती है, तो इसे गृह मंत्रालय को भेजा जाता है। गांव या किसी भी जगह का नाम बदलने का अंतिम अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास होता है। गृह मंत्रालय नाम को हरी झंडी देने से पहले रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि देश में उस नाम का कोई दूसरा गांव पहले से मौजूद न हो। सभी जगह से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी पर राज्य या केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र और कार्यकारी आदेश जारी किया जाता है।
\Bइन जिलों के गांव के नाम हैं अटपटे
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चित्तौडगढ़़: गलियामाल, मायरा, गोदी, सादी, ठुकरावा, घांघसा, रोजड़ा, ओड़ून्द, घोसुण्डा, चोगावडी, रोलाहेडा, पाण्डोली, दुवावा, घोसुण्डी, बिहारी पुरा, बगेरिया, बिलोला, बोबलाकला, बोबला खुर्द, बांडा गणेशपुरा, मायरा, मांदलदा, भिल्याखेडा, दमदमा, आछोडा, जई, दहीखेडा, भुचरतों की खेडी, भडकिया, रास्यामंगरी एवं उन्दरी गांव के नाम है।
अजमेर : आसन, झांक, नाडी, छंदुदरा, चाचियावास, ढाल, घूघरा, गोला, जेठाना, न्यारा, थल, बघेरा, चीतीवास
जयपुर : झरना, झाग, सेवा, आंधी, लाली, बोबास, रसीली, साली
राजसमंद : गवार, कोयल, आत्मा गांव।
भीलवाड़ा: सूंठी, बांका, भूंति, फूलन, सरकी कुंडी, नीमड़ीगवा, पापड़बड़ और भोपी की रेट
प्रतापगढ़ : आड़, चरी, शकरकन्द और बोरी
उदयपुर : सोम, डाल, काट, जूड़ा, नाई, काया, बड़ी, घोड़ा
बांसवाडा : चाचाकोटा, मूलिया, बारी, दानपुर, नादिया, कुण्डल, आसन, बोरी, मोर, घाटा, सेंड नानी, हाण्डी
Updated on:
07 Aug 2026 06:01 am
Published on:
07 Aug 2026 06:01 am
