राज्य सरकार दखल दे तो आ सकता करोड़ों का नया निवेश
भीलवाड़ा।
राजस्थान में बिजली की दर सबसे अधिक होने से राज्य का टेक्सटाइल उद्योग पलायन को मजबूर है। इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो जल्द भीलवाड़ा से बड़ी संख्या में टेक्सटाइल इकाइयां यहां से महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व गुजराज शिफ्ट हो सकती है। इसे रोकने सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। राज्य का बजट आने वाला है। मेवाड़ चेम्बर ने सरकार पर इस ओर ध्यान देने की मांग की।
राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ा है। उद्यमियों ने रुफटॉप व अन्य सौर ऊर्जा संयत्र लगाए हैं। इसकी लागत 3 रुपए प्रति यूनिट आती है। उद्योगों को पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदने के प्रावधान है। इनसे उद्योगों की डिस्कॉम पर निर्भरता घटाने व पावर कम लेने से डिस्कॉम का घाटा बढऩे लगा। इस कारण सरकार ने कई कर व उपकर लगा रखे हैं।
40 पैसा यूनिट बिक्री कर
नितिन, संगम, आरएसडब्ल्यूएम, हिन्दुस्तान जिंक ने केप्टिव पावर प्लांट लगा रखे है। एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट ने पेटकॉक पर प्रतिबंध है। इससे विद्युत उत्पादन लागत 1.50 से बढकर 4.50 रुपए प्रति यूनिट हो गई है। पेटकॉक का उपयोग सीमेंट उद्योग में हो रहा है। केप्टिव पावर प्लांटों से पैदा विद्युत पर इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी (बिक्री) 40 पैसा प्रति यूनिट है।
व्हिलिंग चार्जेज बढ़ाया
राष्ट्रीय पावर एक्सचेंज से किसी भी समय तत्कालीन दर पर पावर खरीद सकता है। व्हिलिंग (लाइन) चार्जेज देना होता है। एक्सचेंज से 3 से 3.25 रुपए प्रति यूनिट में उद्योगों को पावर मिलती थी। वर्ष 2015-16 तक एेसी पावर खरीद पर क्रॉस सब्सिडी चार्ज, लाइन चार्जेज, ट्रांसमिशन चार्जेज मिलाकर 1.45 रुपए प्रति यूनिट डिस्कॉम को देने होते थे। अभी यह चार्जेज बढाकर 3.75 रुपए कर दिए। इसमें सबसे बडी मार क्रॉस सब्सिडी चार्जेज 18 पैसे से बढ़ाकर 1.63 रुपए कर दिया गया। अतिरिक्त सरचार्ज शुन्य से बढ़ाकर 80 पैसा किया है। इतनी वृद्धि के बाद पावर एक्सचेंज से खरीदे पावर की दर 6.50 से 7 रुपए प्रति यूनिट पडऩे लगी है। उत्पादित सौर ऊर्जा पर वर्ष 2016 से इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी लगाई थी। उसे फिलहाल 31 मार्च 2020 तक इसे माफ किया था।
स्वयं की बिजली पर 4 रुपए खर्च
सौर ऊर्जा उत्पादन में अभी नेट मीटरिंग की व्यवस्था है। डिस्कॉम से ली गई ऊर्जा व डिस्कॉम को सप्लाई ऊर्जा के नेट अनुपात पर डिस्कॉम बिल बनाता था। नई व्यवस्था के अनुसार उत्पादित सौर ऊर्जा डिस्कॉम को अनुबंधित दर 3.25 रुपए प्रति यूनिट में देनी होगी। उद्योगों में काम में ली गई ऊर्जा का बिल 7.30 रुपए प्रति यूनिट से देना होगा।स्वयं के लिए बिजली उत्पादन पर भी इकाई को 4 रुपए प्रति यूनिट डिस्कॉम को देना होगा। केन्द्र सरकार ने नेट मीटरिंग की व्यवस्था स्थगित कर रखी है, लेकिन राज्य सरकार ने कोई दिशा निर्देश नहीं दिए।