भीलवाड़ा

जानिए अब क्या होगा भीलवाड़ा नगर परिषद के सभापति का भविष्य, निष्कासन से एक माह बाद मुकदमा

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Expulsion party of the Municipal Council Chairman in bhilwara

भीलवाड़ा।

नगर परिषद सभापति ललिता समदानी का भाजपा से निष्कासन के बाद अब एसीबी में मुकदमा दर्ज हो गया है। अब इसमें आगे क्या होगा, इसकी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एसीबी में मुकदमा दर्ज होने से समदानी के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।मुकदमा दर्ज होने से पहले चर्चा थी कि पद से हटाने की स्थिति में सभापति कोर्ट में जा सकती है और स्टे ला सकती है। एेसा नहीं हुआ तो भाजपा के पार्षद अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। इसमें पार्टी के पास बहुमत के लिए करीब 42 पार्षद होना जरूरी है।

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सभापति को कुर्सी बचानी है तो कम से कम 14 पार्षद पक्ष में लेना जरूरी है। सभापति ललिता समदानी को अनुशासनहीनता के मामले में दो अगस्त को पार्टी की सदस्यता से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी छह वर्ष के लिए निष्कासित कर चुके हैं। समदानी के निष्कासन को 30 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। अब तक कार्रवाई को लेकर सरकार संशय में है। परिषद में काम पूरी तरह ठप हो चुका है। निविदा नहीं होने से इंजीनियरों के पास काम नहीं है। जो फाइलें थी, उन्हें यथास्थिति में रखते हुए कर्मचारियों ने काम बिल्कुल बंद कर दिया है। उधर, परिषद के बाहर शहर में काम धड़ल्ले से चालू है।

ये मामले विवादास्पद
1. नगर परिषद में कचरा संग्रहण के लिए मंगाए गए ऑटो टिपर में शिकायत।
2. स्वीकृत जगह से अन्यत्र सीसी सड़क निर्माण।
3. परिषद में मोबाइल एप निर्माण में गड़बड़ी।
4. खुद के घर में अतिक्रमण को नियम विरुद्ध जा नक्शा पास करने का आरोप।
5. विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी व सांसद सुभाष बहेडि़या के काम में अडंग़े लगाना।

अवैध निर्माण रोकने वाला कोई नहीं
नगर परिषद क्षेत्र में मनमर्जी से निर्माण हो रहे हैं। शहर में जगह-जगह बिना स्वीकृति के गड्ढे खोदे जा रहे हैं। निजी संचार कंपनियां केबल लाइनें डाल रही हैं। अवैध निर्माण पर कोई नोटिस देने वाला नहीं है। जिन लोगों ने पहले काम रोक रखे थे, अब बिना स्वीकृति हो रहे हैं। उपसभापति मुकेश शर्मा, पार्षद विजय लढ़ा, मुकेश चेचाणी, पीयूष डाड ने बताया कि शहर में विकास कार्य अटका हुआ है।


गहराता गया विवाद

आयुक्त पद्मसिंह नरूका व सभापति समदानी के बीच पहले से विवाद है। आयुक्त आधे से ज्यादा समय बाहर रहते हैं। सभापति समदानी परिषद में न के बराबर आ रही हैं। उप सभापति मुकेश शर्मा नियमित रूप से बैठ रहे हैं, लेकिन उनके पास वित्तीय अधिकार नहीं हैं। एेसे में आमजन के जरूरी काम भी अटक गए हैं।

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Published on:
08 Sept 2018 08:51 pm
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