भीलवाड़ा

किसान बरतें सावधानी, नकली उर्वरक खरीद से बचें

कृषि विभाग किसानों को कर रहा सतर्क बीज बुवाई के लिए खेत तैयार, किसानों ने मिट्टी को किया ऊपर-नीचे

2 min read
May 30, 2025
Farmers should be cautious and avoid buying fake fertilizers

भीलवाड़ा कृषि विभाग की ओर से बताए गए टिप्स अपनाकर किसान नकली उर्वरक की ठगी से बच सकेंगे। कृषि विभाग के अधिकारी उर्वरक के नाम पर हो रही ठगी से किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

किसानों ने खरीफ सीजन की बुआई के लिए खेतों को तैयार कर दिया है। इसे देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सतर्क रहने को कहा है। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार वी के जैन ने बताया कि किसान खरीफ सीजन की बुआई करने के लिए खेतों को तैयार करेंगे। खरीफ फसलों की उपज बढ़ाने के लिए किसान उर्वरकों का उपयोग भी करते हैं। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग डीएपी के असली दिखने वाले बैग्स में नकली उर्वरक भरकर बेच देते हैं, इसका सीधा नुकसान किसान और फसल को होता है। किसान उर्वरक खरीदते समय कुछ सामान्य जानकारी रखकर बाजार में मिलने वाले नकली उर्वरकों की पहचान कर ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं। नकली बीज एवं उर्वरक न केवल उत्पादन को प्रभावित करते हैं। बल्कि किसान को आर्थिक रूप से भी नुकसान पहुंचाते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

किसान बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। किसान कृषि आदान ऑनलाइन नहीं मंगाएं। अधिकृत विक्रेता से बिल अवश्य प्राप्त करें। निर्धारित मात्रा एवं सही आदान का ही प्रयोग करें। असली उर्वरकों की पहचान संबंधी सामान्य जानकारी रखकर किसान उर्वरक खरीदते समय होने वाले नुकसान से बच सकते हैं।

ऐसे करें पहचान

यूरिया: यूरिया के सफेद गोल आकार के एक जैसे दाने होते हैं। इसकी पहचान के लिए यूरिया के कुछ दानों को एक पानी के गिलास में डालकर उसे हिलाने पर संपूर्ण यूरिया पानी में घुल जाता है। पानी को छूने पर ठंडा महसूस हो तो यूरिया असली है।

डीएपी: डीएपी के दाने कंकर की तरह अनियमित आकार लिए होते हैं। इसकी पहचान के लिए डीएपी के दानों को हथेली में रखकर तंबाकू की तरह इसमें चूना मिलाकर रगड़ते हैं तो तेज गंध का अहसास हो तो डीएपी असली है।

पोटाश: असली पोटाश सफेद नमक एवं लाल मिर्च जैसा होता है। असली पोटाश के दाने नमी होने पर या उसमें पानी मिलाने पर आपस में चिपकते नहीं हैं।

जिंक सल्फेट: जिंक सल्फेट हल्का सफेद या पीले भूरे रंग का होता है। इसकी पहचान के लिए डीएपी के घोल में जिंक सल्फेट मिलाने पर थक्केदार घना अवशेष बन जाए तो यह असली है।

Published on:
30 May 2025 08:46 am
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