
भीलवाड़ा।
किसानों को कृषि उपकरणों पर अनुदान के लिए उपकरण खरीदने से पहले कृषि विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति लेनी होगी। कृषि विभाग ने सबमिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत कृषि यंत्र अनुदान वितरण के लिए वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह घोषणा की है। इसमें किसानों को स्वीकृति के लिए ई-मित्र से आवेदन करना होगा। अभी किसान अनुदान योजना में आवेदन कृषि उपकरणों पर अनुदान प्राप्त कर रहे है। खास बात यह है कि आवेदन ऑनलाइन करने पर भी पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर अनुदान दिया जाएगा।
कृषि विभाग के उपनिदेशक जीएल चावला ने कहा, नए आदेश के तहत कृषि उपकरण खरीदने से पहले आवेदन करना होगा। उसकी प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के बाद ही उपकरण खरीदा जा सकेगा। यह भी पंजीकृत विक्रेताओं से ही खरीदना होगा। वहीं किसानों का कहना है कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही समाप्त हो चुकी है। देरी से जारी गाइडलाइन से इस वर्ष उपकरण खरीद चुके किसान अनुदान के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। किसानों ने मांग की कि गाइडलाइन जारी होने से पहले उपकरण खरीद चुके किसानों को भी अनुदान दिया जाए। योजना में बदलाव की जानकारी दी जाए।
उपकरणों पर 60 प्रतिशत तक अनुदान
पावर टिलर, राइस ट्रांसप्लांटर, स्वचलित यंत्र, पोस्ट हॉल डिग जैसे विशिष्टीकृत स्वचलित यंत्र, उद्यानिकी स्वचलित यंत्र पर 20 से 35 प्रतिशत अनुदान देय है।
-तिलहन फसल प्रोत्साहन के तहत हस्तचलित, बैल चलित, शक्तिचलित उपकरणों पर 40 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान देय है।
-गेहूं फसल प्रोत्साहन योजना के तहत रोटावेटर व टर्बोसीडर व मल्टीक्रॉप थ्रेसर उपकरणों पर ४० से ५० प्रतिशत तक का अनुदान देय है।
-दलहन उत्पादन प्रोत्साहन के तहत रोटावेटर व मल्टीक्रॉप थ्रेसर सहित सीडड्रिल, स्पाइरल सीड ग्रेडर, मूवेबल थ्रेसिंग फ्लोर व 10 हॉर्सपावर के पम्पलेट पर अलग-अलग श्रेणियों में 40 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान देय है।
- अधिक हॉर्सपावर क्षमता के ट्रेक्टर पर अलग-अलग श्रेणी के चलित भूमि सुधार यंत्र, बुवाई, रोपण, खुदाई, अंटर कल्टीवेशन यंत्र पर 40 से 60 प्रतिशत तक का अनुदान देय है।
- अपशिष्ट प्रबंधन यंत्र, कटाई व गुहाई सहित चाप कट्टर, हस्त व पशु चलित यंत्र, उद्यामिकी, पोस्ट हार्वेस्ट टेक्रोलॉजी यंत्र, पौध संरक्षण यंत्र, हाइड्रोपोनिक मशीन आदि कृषि यंत्रों पर 40 से 60 प्रतिशत तक का अनुदान देय है।
जिले में लक्ष्य से अधिक बुवाई
जिले में मानसून के दस्तक देने के साथ ही किसानों ने भी अपने खेतों में फसलों की बुवाई शुरू कर दी है। इस बार किसानों की पहली पंसद मूंग व उड़द बनी है। हालांकि दोनों फसलों में अब तक ज्यादा बुवाई नहीं हुई। कृषि विभाग को उम्मीद है कि इस बार दोनों फसलों किसान ज्यादा रूचि ले रहे है। जिले में मुख्य रूप से मक्का, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, तिल बीटी कॉटन की बुवाई होती है। विभाग का यह भी मानना है कि जिले में ऐसे तो सोयाबीन की बुवाई ज्यादा होती है, लेकिन इस बार मूंग व उड़द का समर्थन मूल्य अधिक होने से किसान इस पर ज्यादा ध्यान दे रहे है।