इंदिरा रसोई योजना में साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था
भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा सहित प्रदेश में लागू की गई इंदिरा रसोई योजना में मेज-कुर्सी पर भोजन करवाने की व्यवस्था शुरू की गई है। मात्र अटा रुपए में भोजन की थाली मिल रही है, लेकिन फिलहाल रसोई को खाने वालों का इंतजार है। इंदिरा रसोई में अपेक्षाकृत काफी कम लोग पहुंच रहे है। जबकि साफ. सफाई के साथ भोजन बन रहा है और व्यवस्थाएं भी माकूल है। महात्मागांधी चिकित्सालय परिसर, शास्त्रीनगर अम्बेडकर भवन के पास तथा कोटा रोड स्थित सामुदायिक भवन में बेशक रसोई तक पहुंचने वालों की तादाद बढ़ी है, लेकिन इन क्षेत्रों में ५० से ८० थाली प्रतिदिन का आंकड़ा भी नहीं पहुंचा है। राजस्थान पत्रिका की टीम ने बुधवार को शहर के तीनों इंदिरा रसोई का जायजा लिया।
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स्थान- महात्मा गांधी चिकित्सालय परिसर। दोपहर 12 बजे
सेनिटाइजर का भी इंतजाम
महात्मा गांधी अस्पताल परिसर के कैंटिन के पीछे संचालित इन्दिरा रसोई में दो व्यक्ति खाना खा रहे हैं। एक-दो लोग खाने के लिए आ रहे थे। जिन्हें वहां के एक सदस्य ने टोकते हुए कहा कि पहले अपने हाथ व पैर धोकर आए। उसे बाद में ही नि:शुल्क भोजन के लिए कूपन दिया गया। यहां मानव सेवा समिति की ओर से नि:शुल्क भोजन दिया जाता है। संस्था की ओर से खाने में मिक्स सब्जी, दाल, अचार और चार चपाती दी जा रही हैं। खाना खाने वाले रमेश ने बताया कि खाना बहुत अच्छा है। रोटियां गर्मा-गर्म मिल रही हैं। वहां पर कार्यरत महिला ने बताया कि अभी तक ४८ लोग भोजन कर चुके हैं। दोपहर एक बजे तक १० जने और आ जाएंगे। दोनो समय मिलाकर सौ जने खाना खाना आ रहे है। यहां पर प्रवेश द्वार पर ही सेनिटाइजर की व्यवस्था कर रखी है। हाथ धोने के लिए अलग से नल लगे है। लेकिन टेम्परेचर नहीं लिया जा रहा था।
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स्थान- शास्त्रीनगर अरिहन्त चिकित्सालय के पास। समय. दोपहर 12.२० बजे
सामुदायिक भवन में संचालित इन्दिरा रसोई में दो लोग भोजन कर रहे थे, जबकि दो लोग खाना पैक कराने के लिए खड़े थे। यहां पर न सेनिटाइजर था और न ही टेम्परेचर चैक किया जा रहा था। कम्प्यूटर में महिला कर्मचारी ने बताया कि यहां सुबह शाम में करीब १५० से अधिक लोग खाना खाने आ रहे हे। बुधवार सुबह तक ८८ लोग आ चुके थे। खाने में लौकी, दाल, अचार और चार से पांच रोटी दी जा रही थी।
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स्थान-कोटा रोड स्थित सामुदायिक भवन। समय दोपहर १२.४५ बजे
सामुदायिक भवन में बने एक हॉल में पांच-छह जने खाना खा रहे थे। दादाबाड़ी निवासी राकेश खटीक ने बताया कि खाना बहुत अच्छा है। घर जैसा खाना वह गरम मिल रहा है। उसने बताया कि उसके खेती बाड़ी है, लेकिन जबसे यहां इन्दिरा रसोई शुरू हुई तभी से खाना खाने आ रहा है। यहां लाइट बन्द होने के कारण कंप्यूटर पर बैठे युवक मनीष शर्मा ने बताया कि एक समय १५० व्यक्ति के भोजन की व्यवस्था रहती है, लेकिन एक समय में ७०-८० जने ही आ रहे है। लोगों को अभी इसकी जानकारी नहीं है। धीरे-धीरे संख्या बढ़ रही है। यहां हाथ धोने के लिए अलग से व्यवस्था कर रखी है, लेकिन टेम्परेचर लेने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
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फिलहाल दूर की कौड़ी है ३०० का टारगेट
शहर में तीन स्थानों पर इन्दिरा रसोई का संचालन किया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से नगर परिषद स्तर पर सुबह और शाम के लिए १५०-१५० थाली निर्धारित की गई हैं। लेकिन शहर का एक भी सेंटर इस आंकड़े के करीब तक भी नहीं पहुंच रहा। सर्वाधिक लोग शास्त्रीनगर अरिहन्त चिकित्सालय के पास वाल भवन स्थित रसोई में खाना खा रहे हैं। लेकिन ३०० का आंकड़ा कहीं भी नहीं छू पा रहे हैं। हालांकि इसका एक कारण शहर व जिले में लगातार कोरोना का आंकड़ा बढऩा है।