
भीलवाड़ा।
सरपंच बनने से पहले वे शिक्षिका थी। जब उच्च शिक्षित होकर गांव की सरपंच बनी तो पूरी पंचायत को साक्षर करने का जिम्मा आ गया। उन्होंने मौका नहीं छोड़ा और अपने क्षेत्र की मलाला बन गई। सरपंच की कुर्सी पर होते हुए भी कभी पंचायत में साक्षरता की कक्षा लगाई तो कभी क्षेत्र की स्कूलों में पढ़ाने पहुंच गई।
यह प्रेरणास्पद कहानी है जिले की दहीमथा सरपंच मीनाक्षी कंवर उदावत की। वे करेड़ा तहसील में सर्वाधिक मतों से जीतकर सरपंच बनी। मीनाक्षी कंवर एमए, बीएड, एम फिल है। मीनाक्षी ने बताया कि राजनीति में आने के बाद लगा कि वे शिक्षा की अलख का सपना पूरा नहीं कर पाएगी लेकिन एेसा नहीं हुआ। कुर्सी पर बैठने के बावजूद महिलाओं को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। उच्च शिक्षित होने का फायदा यह रहा कि पंचायत की अधिकांश महिलाओं को साक्षर किया।
शिक्षित महिलाओं की टीम तैयार की, जिसे गांव की निरक्षर महिलाओं को साक्षर बनाने में लगा दिया। टीम सप्ताह में दो दिन गली-मोहल्लों में निरक्षर महिलाओं को आखर ज्ञान देने लगी। वे खुद पंचायत व परिवार के कार्यों के साथ कॉलेज व स्कूली बालिकाओं को निशुल्क कोचिंग देने लगी। मीनाक्षी के ससुर नरपत सिंह चुंडावत उप सरपंच हैं। वे उनकी मदद करते हैं।
साक्षरता में मिला सम्मान
साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य पर जिला स्तरीय अधिकारियों ने दहीमथा महिला सरपंच का महिला सशक्तिकरण दिवस पर सम्मान किया। मीनाक्षी कंवर पूर्व में वनस्थली विद्यापीठ में अध्यापिका थी। इस कारण उन्हें पढ़ाने में ज्यादा रुचि है।
स्कूलों में पेयजल के इंतजाम पर कलक्टर ने मांगी रिपोर्ट
भीलवाड़ा. सरकारी स्कूलों में पेयजल का इंतजाम नहीं होने पर जिला कलक्टर शुचि त्यागी ने जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने मंगलवार को बच्चों का दूध से तर कर रहे हैं हलक, इधर स्कूलों में पानी की मारामारी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
इस समाचार में बताया गया था कि स्कूलों में बच्चों को दूध तो पिलाया जा रहा है लेकिन पीने के पानी का संकट है। इस कारण बच्चों को असुविधा हो रही है। जिला कलक्टर ने इसे गंभीरता से लिया और डीईओ से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही पेयजल के इंतजाम करने के निर्देश दिए है।