शहर से बीस किलोमीटर दूर ईको पार्क भले पर्यटन के लिहाज से नए ठिकाने के रूप में उभर रहा है, लेकिन यहां आने वाले लोगों के लिए सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। यहां घूमने आने वालों को खाने-पीने का सामान तक साथ लाना होता है। कहने को कैंपिंग साइट पर दो टैंट और डाइनिंग हॉल बनाया गया, लेकिन मूलभूत सुविधा देना वन विभाग भूल गया। ऐसे में पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लिहाजा लोग ईको पार्क से किनारा कर रहे हैं।
शहर से बीस किलोमीटर दूर ईको पार्क भले पर्यटन के लिहाज से नए ठिकाने के रूप में उभर रहा है, लेकिन यहां आने वाले लोगों के लिए सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। यहां घूमने आने वालों को खाने-पीने का सामान तक साथ लाना होता है। कहने को कैंपिंग साइट पर दो टैंट और डाइनिंग हॉल बनाया गया, लेकिन मूलभूत सुविधा देना वन विभाग भूल गया। ऐसे में पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लिहाजा लोग ईको पार्क से किनारा कर रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ने ईको पार्क का जायजा लिया तो कुछ इसी तरह के हालात नजर आए।
रात में रूकने के लिए जेब पर भार, सुरक्षा का नहीं ख्याल
रात में अगर किसी को ईको पार्क में ठहरना हो तो जंगली जानवरों से सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं है। यहां चिंकारा, जरख, लोमड़ी, हिरण, जरख, खरगोश, तीतर, मोर, नीलगाय, जंगली सुअर, सेही, अजगर अच्छी खासी तादाद में है। यहां रात में जंगल सफारी का आनंद लिया जा सकता है। इसके लिए वन विभाग ने झोपड़ी, डाइनिंग और डोरमेट्री की अलग-अलग रेट तय कर रखी है। हालांकि खाने-पीने का सामान यहां उपलब्ध नहीं कराया गया। खानपान के यहां कोई बंदोबस्त नहीं है। यहां ऐसी व्यवस्था कर पर्यटकों को लुभाया जा सकता है। विभाग का मानना है कि सालभर में करीब डेढ़ हजार लोग घूमने यहां आते हैं। मानसून सीजन में लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है।
टावर से नजर आता 20 किमी क्षेत्र, सात किमी का ट्रैक
ईको पार्क में वाच टावर बना है, जिससे 15 से 20 किलोमीटर दायरे का नजारा लिया जा सकता है। सात किलोमीटर का ईको ट्रैक बना है, जिस पर वाहन आते-जाते हैं। सनसेट पाइंट से बनास नदी का दृश्य आकर्षक लगता है। करीब 526 हैक्टेयर में फैला यह संरक्षित घना जंगल है। इसके चलते इसे ऑक्सीजन का हब भी कहा जाता है।
कोरोना में बंद की कैंटीन
कोरोना काल से पूर्व ईको पार्क में कैंटीन थी। कैंटीन में पर्यटकों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन कोरोना महामारी में कैंटीन बंद कर दी गई। इसे वापस चालू कराएंगे। पर्यटकों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध है। वन विभाग की ओर से पांच कर्मचारी यहां तैनात हैं।
- देवकिशन दरोगा, प्रभारी, इक्को पार्क, हमीरगढ़