
कानाराम मुण्डियार
भीलवाड़ा.
डॉक्टर्स को ऐसे ही भगवान नहीं कहा जाता। क्योंकि किसी की जिन्दगी बचाने में डॉक्टर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती हैं। आपात मेडिकल इमरजेंसी में डॉक्टर को मरीज की जान बचाने के (Heart attack in flight ) को मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत पड़ी। तीनों ही चिकित्सकों ने जांच के साथ ही प्रारंभिक उपचार कर सहयात्री की जान बचाई। इसके लिए एयरलाइंस ने उन्हें सम्मानित भी किया।
जानकारी के अनुसार निवेदिता पुणे के केईएम हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। वे लंदन की नामी परीक्षा रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ (एमआरसीपीसीएच) देने कोलकाता गई थी। परीक्षा के बाद मंगलवार को इंडिगो की फ्लाइट से पुणे लौट रही थी कि बीच रास्ते में महाराष्ट्र की बुजुर्ग महिला यात्री को हार्ट अटैक आ गया। साथ यात्रा कर रही पोती भी इसे देख घबरा गई। बकौल निवेदिता फ्लाइट में चिकित्सक की जानकारी को लेकर एनाउंसमेंट होने पर मैं एवं दो अन्य चिकित्सक आगे आए। फ्लाइट में दवाई, इंजेक्शन सहित अन्य आवश्यक आपात चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध होने पर महिला का प्रारंभिक उपचार किया गया। बाद में मेडिकल इमरजेंसी देखी और प्लेन को डाइवर्ट कराया। विमान बीच रास्ते छत्तीसगढ़ के रायपुर हवाई अड्डे उतारा गया। महिला को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जिससे समय पर इलाज मिलने से जान बच गई।
टीम के प्रयास से मिली जीत-
डॉ. निवेदिता सहित अन्य चिकित्सकों को इस कार्य पर इंडिगो टीम ने प्रमाण पत्र डन इट विदाउट यू प्रदान किया। निवेदिता बताती है कि बुजुर्ग महिला की जान बचाने में हम तीन चिकित्सकों के साथ ही यात्रियों, फ्लाइट के कैप्टन व सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने अपने-अपने स्तर पर बुजुर्ग महिला यात्री के लिए जो कुछ कर सकते थे, वो किया। फ्लाइट को डायवर्ट करने से यात्री अपने-अपने गंतव्य तक देरी से भी पहुंचे, लेकिन मानव सेवा के आगे यात्रियों ने इसकी परवाह नहीं की।