प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत अब शहरी क्षेत्र अथवा कस्बों में शामिल राजस्व गांवों की कृषि भूमि पर बने मकानों के भी पट्टे दिए जा सकेंगे।
प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत अब शहरी क्षेत्र अथवा कस्बों में शामिल राजस्व गांवों की कृषि भूमि पर बने मकानों के भी पट्टे दिए जा सकेंगे। इस भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित नगरीय निकाय के नाम आबादी भूमि के रूप में दर्ज किया जाएगा। लेकिन, शर्त यह है कि ऐसी कृषि भूमि पर मास्टर प्लान अधिसूचित होने, नगरपालिका बनने से पहले अथवा 31 दिसंबर, 2021 से पहले निर्माण हो चुका हो। इसके लिए राज्य सरकार ने नियमों में छूट दी है।
नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग के अनुसार ऐसे भूखंडों या निर्माणों को मास्टर प्लान में भिन्न भू-उपयोग दर्शाए जाने पर भी कमिटमेंट मानते हुए धारा 90-ए(8) की कार्रवाई की जाएगी। संबंधित स्थानीय निकाय स्वतः सर्वे करवाकर 60 फीसदी से अधिक (सघन आबादी) निर्माण है, तो सड़क की चौड़ाई न्यूनतम 20 फीट और 60 फीसदी से कम निर्माण हो तो 30 फीट की सड़क रखते हुए शुल्क एवं लीज लेकर फ्री होल्ड के पट्टे दे सकेंगे।
पट्टे के लिए सड़क के बीच से नापेंगे दूरी
शहरी क्षेत्रों में सड़क किनारे कृषि भूमि पर बने मकान-दुकान और भूखंडों पर निर्माण यदि 31 दिसंबर, 2021 से पहले हो चुका है। वहां मौजूदा मुख्य सड़क के बीच से सड़क क्षेत्र की दूरी नाप कर सुविधा क्षेत्र छोड़ते हुए पट्टे दिए जा सकेंगें।
एंपावर्ड कमेटी तय करेगी
ऐसे मामले जहां नेशनल अथवा स्टेट हाइवे शहर या कस्बे के बीच से गुजर रहे हैं और उनकी वजह से मकानों का नियमन नहीं हो पा रहा है। उन मामलों में स्थानीय एंपावर्ड कमेटी मार्गाधिकार तय करेगी। कई शहरों में नेशनल एवं स्टेट हाइवे के बाइपास बन गए हैं। इससे शहर के अंदर गुजर रहे हाइवे की सड़कें भी अन्य सड़कों की तरह शहरी सड़कों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। शहर के अंदर की ऐसी सड़कों की चौड़ाई हाइवे के आधार पर या उससे अधिक मास्टर प्लान में रखी हुई है। जबकि उनके दोनों तरफ निर्माण हो चुके हैं। इसलिए अब पुनः निर्धारित मार्गाधिकार के अनुसार ही योजनाओं या भूखण्डों का नियमन हो सकेगा। जिन कॉलोनियों का पहले हाइवे की सीमा को छोड़ते हुए नियमन किया गया है, वहां अब पुनः पट्टे दिए जा सकेंगे अथवा पट्टों के क्षेत्रफल में संशोधन किया जा सकेगा।