भीलवाड़ा

एसओजी सख्ती नहीं दिखाता तो गिरफ्तारी ही नहीं हो पाती

भीलवाड़ा महिला अरबन कॉपरेटिव बैंक में घपले के जिस मामले में पूर्व अध्यक्ष कीर्ति बोरदिया व उसके पति रविन्द्र बोरदिया को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया था, उसे मामले को कोतवाली की ही पुरानी जांच टीम ने घपला नहीं माना और फाइल ही बंद कर दी थी। Bhilwara Mahila Urban Cooperative Bank

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If SOG does not show strictness then arrest does not happen

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा महिला अरबन कॉपरेटिव बैंक में घपले के जिस मामले में पूर्व अध्यक्ष कीर्ति बोरदिया व उसके पति रविन्द्र बोरदिया को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया था, उसे मामले को कोतवाली की ही पुरानी जांच टीम ने घपला नहीं माना और फाइल ही बंद कर दी थी। Bhilwara Mahila Urban Cooperative Bank

सूत्रों के अनुसार कोतवाली पुलिस ने बैंक घपले में श्री सांईनाथ डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड नामंक एजेंसी को मुख्य षडयंत्रकारी माना है। इसी एजेंसी में रविन्द्र बोरदिया थी निदेशक थे। जिस मामले में पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी शनिवार को जोधपुर से हुई है, उस प्रकरण को वर्ष २०१७ में अनुसंधान के दौरान आपसी लेन-देन का मानते हुए कोतवाली पुलिस की पुरानी जांच टीम ने फाइल बंद कर दी थी।

बैंक में हुए वित्तीय अनियमितता से जुड़ी सभी फाइलों को बाद में एसओजी ने मुख्यालय पर तलब कर ली। एसओजी ने प्रकरण की प्रारंभिक पड़ताल की तो माना की यह मामला आपसी लेन-देन का नहीं वरन् सीधे तौर पर बैंक में गबन से जुड़ा है। एसओजी ने जिला पुलिस अधीक्षक को समूचे मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए। इसके बाद कोतवाली ने प्रकरण की नए सिरे से जांच शुरू की और शनिवार को बोरदिया दंपती को गिरफ्तार कर लिया। If SOG does not show strictness then arrest does not happen


कोतवाली प्रभारी चौधरी ने बताया कि प्रकरण से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है, इसी प्रकार बैंक गबन से जुड़े अन्य मामलों में भी जानकारी हांसिल की जा रही है।


पुलिस अधीक्षक प्रीति चन्द्रा ने बताया श्री साईनाथ धाम डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों से मिलीभगत कर रविन्द्र बोरदिया आदि ने भीलवाड़ा शहर के भोले-भाले लोगों को किस्तों में भूखंड देने की योजना बताकर करोडों रुपए ले लिए, लेकिन ग्राहकों को भूखंड नही दिए। पुलिस अनुसंधान के दौरान लोगों की जमा राशि को धोखाधड़ी पूर्वक श्री सांईनाथ धाम के डायरेक्टर के साथ मिलकर हड़पना प्रमाणित पाया गया । उन्होंने बताया कि अभियुक्तगणो द्वारा अन्य मुल्जिमानों के साथ मिलकर योजना बद्ध तरीके से विभिन्न महिला आवेदकों के नाम फ र्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋ ण आवेदन प्रस्तुत कर करोडों रुपए के ऋ ण स्वीकृत करा लेते और राशि अपने द्वारा संचालित विभिन्न फ र्मो व अपने-अपने सहयोगियो के बैंक खातों मे स्थानान्तरित कर देते।

Published on:
29 Nov 2020 10:57 am
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