भीलवाड़ा

ऐसे होगी जांच तो कैसे आएगी दोषियों पर आंच…

कोठारी ओवरब्रिज: जिसकी गुणवत्ता रिपोर्ट पर 4.38 करोड़ का हुआ भुगतान, वही जांचेगी पुलिया की क्वालिटीन्यास ने एमएनआईटी से सात दिन में मांगी जांच रिपोर्टपीडब्ल्यूडी अफसर भी जांच में होंगे शामिल

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Dec 05, 2022
ऐसे होगी जांच तो कैसे आएगी दोषियों पर आंच...

भीलवाड़ा. कोठारी नदी पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज में भ्रष्टाचार मामले की जांच जयपुर की मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी (एमएनआईटी) और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी करेंगे। यहां दिलचस्प है कि ओवरब्रिज को लेकर ठेका कंपनी को हाल में 4.38 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ, वह एमएनआईटी की गुणवत्ता रिपोर्ट के आधार पर ही हुआ। भुगतान के दो दिन बाद ही ओवरब्रिज में भारी भ्रष्टाचार का नमूना सामने आया। अब फिर उसी एमएनआईटी को जांच में शामिल कर लिया गया।

नगर विकास न्यास (यूआईटी) की कार्यवाहक सचिव रजनी माघीवाल ने एमएनआईटी के एसोसिएट डीन (आर एंड सी) एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरुण गौड को जांच करने के लिए पत्र लिखा। इसमें ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त हिस्से का सैम्पल लेकर सात दिन में जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा। इस मामले की जांच सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी भी करेंगे। न्यास की चार सदस्यीय कमेटी भी जांच करेगी।
समय-समय पर जांचनी थी गुणवत्ता
एमएनआईटी को लिखे पत्र में कहा कि कोठारी ओवरब्रिज का निर्माण एचएस मेहता अजमेर कर रहे हैं। 2 दिसम्बर को ब्रिज पर बड़ा सुराख होने की सूचना पर जिला कलक्टर व न्यास अध्यक्ष एवं अधिकारियों ने मौका देखा। वहां ब्रिज की स्लैब में 2 से 3 इंच के छेद नजर आए। ब्रिज के नीचे से देखने पर पता चला कि दोनों गर्डर के बीच स्लैब का करीब 12 फीट लंब टुकडा क्षतिग्रस्त है, जबकि इस कार्य में एमएनआईटी ने समय -समय पर गुणवत्ता की रिपोर्ट दी। उसी आधार पर ठेका एजेंसी को भुगतान किया गया। गौड़ से अब जांच कर गुणवत्ता रिपोर्ट सात दिन में मांगी गई है।
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तीन अहम सवाल, जिनके यूआईटी को देना चाहिए जवाब
कोठारी नदी पर निर्माणाधीन पुलिया के लोकार्पण से पहले ही क्षतिग्रस्त होने से न्यास की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार के इस मामले में तीन सवाल अहम है। पहला-चर्चा है कि न्यास प्रशासक आशीष मोदी की ओर से गठित जांच समिति में न्यास के अधिकारी शामिल किए गए, जबकि न्यास ही निर्माण कार्य करा रहा है। उसी निर्माण में भ्रष्टाचार का बड़ा सुराख हाल में नजर आया। दूसरा-नए सिरे से एमएनआईटी से गुणवत्ता रिपोर्ट लेंगे, जबकि वह अब तक की घटिया क्वालिटी का निर्माण पकड़ नहीं पाया। तीसरा-यूआईटी की ओर से अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया, जबकि न्यास के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चलना चाहिए था।

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यदि पहले गलत रिपोर्ट दी तो अब सच आ जाएगा सामने: मोदी
ओवरब्रिज में भ्रष्टाचार और जांच को लेकर यूआईटी न्यास प्रशासक व जिला कलक्टर आशीष मोदी से बातचीत के प्रमुख अंश-
-पत्रिका: जांच कमेटी पर सवाल उठ रहे हैं?
मोदी: जांच कमेटी में पीडीब्ल्यूडी व एमएनआईटी को शामिल किया है। कमेटी की जांच किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होगी।
- पत्रिका: यूआईटी के अधिकारियों का बचाव की चर्चा है?
मोदी: किसी भी अधिकारी का बचाव नहीं किया जा रहा है। जांच में किसी की संलिप्तता पाई गई तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
- पत्रिका : एमएनआईटी की ही गुणवत्ता रिपोर्ट पर संवेदक को भुगतान किया था, इसके बावजूद फिर से इसी एजेंसी से जांच क्यूं कराई जा रही है?
मोदी: एमएनआईटी राज्य सरकार की एजेंसी है। क्वालिटी की जांच के लिए इसी एजेंसी से अनुबंध है। यहां की लैब के अधिकारी व कर्मचारी एक अंतराल में बदलते रहते हैं।
- पत्रिका : किसी थर्ड पार्टी से भी जांच हो सकती थी?
मोदी: किसी थर्ड पार्टी यानी प्राइवेट एजेंसी के बजाए सरकारी एजेंसी अधिक विश्वसनीय है। यदि इसी एजेंसी ने पूर्व में कोई गलत रिपोर्ट की है तो उसकी भी वास्तविकता सामने आ जाएगी।
- पत्रिका: क्षतिग्रस्त पुलिया की जांच का दायरा क्या होगा?
मोदी: निर्माणाधीन पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के मामले को गंभीरता से लिया है। जिस दिन मौका देखा, उसी दिन जांच के आदेश दे दिए। निर्माण कार्य का भुगतान किस आधार पर हुआ है, इसकी रिपोर्ट मांगी है।

Published on:
05 Dec 2022 10:50 am
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