
भीलवाड़ा. पुरानी कुरीतियों को त्याग कर उसमें लाना आज की महत्ता आवश्यकता है। ऐसी ही एक शिक्षा को चरितार्थ किया है भीलवाड़ा के सांगानेर निवासी सेवानिवृत प्रधानाचार्य भंवर दास वैष्णव के पुत्र जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध वैष्णव व उनके भाई कॉलेज सहायक आचार्य आदित्य ने। इनकी पत्नी अमृता व दिव्या ने मिलकर अपनी माता उषा वैष्णव के निधन पर मृत्युभोज नहीं करने का निर्णय किया।
वैष्णव ने अपनी माता उषा वैष्णव के देहांत पर मृत्युभोज के स्थान पर सांगानेर में बाल भोज और गौ माता को भोज करने का निर्णय लिया। इसके चलते सांगानेर के निजी व सरकारी सभी विद्यालयों के सैकड़ों बच्चों को बाल भोज तथा सैकड़ों गायों को आयुर्वेदिक लापसी वितरण किया। वैष्णव ने बताया कि जब बच्चा समाज में न सिर्फ अच्छी बातें सुनेगा वरन कुछ सकारात्मक व अच्छा होता हुए भी देखेगा तो वह खुद-ब-खुद सही निर्णय क्षमता के साथ बड़ा होगा और आने वाले भविष्य में एक बेहतर परिवार व समाज बना पाएगा। वैष्णव ने बताया कि उनकी माता हमेशा दूसरों के लिए पहले व खुद के लिए बाद में सोचती थी, उनका कहना था बेटा खुद के लिए तो पशु भी जीते हैं। मानव होने का अर्थ परिवार व समाज के लिए समझ और संबंध के साथ जीना ही है l इसी संस्कार के चलते उन्होंने मृत्यु भोज को सिर्फ कुप्रथा के रूप में कोसने की बजाए उसका एक बेहतरीन विकल्प प्रदान किया। इसके तहत वैष्णव परिवार ने बालभोज और गौमाता को 201 किलो आयुर्वेदिक लापसी खिलाई।
वैष्णव परिवार ने किसी दबाव की बजाए स्वयं की प्रेरणा से भोज करने और समाज में प्रेरणा रूपी एक राह दिखाने के लिए मिलकर यह आवश्यक कदम उठाया है। वैष्णव समाज और सांगानेर के लोगो ने इस प्रयास की सराहना की है। इस कार्य में सांगानेर स्टडी सर्कल के सदस्य रवि वैष्णव, विशाल वैष्णव, भरत पाराशर, सौरभ पाराशर, शुभम सेन, मनीष टेलर, गोविंद प्रजापत, महावीर माली, हिमांशु पाराशर, योगेश वैष्णव का साथ रहा।