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राजस्थान के कपड़ा व्यापारियों को बड़ी राहत: केंद्र सरकार ने घटाई निवेश-टर्नओवर की सीमा, भीलवाड़ा समेत इन जिलों को फायदा

केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल पीएलआई स्कीम के तहत निवेश की न्यूनतम सीमा घटाकर 50 करोड़ और टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपए कर दी है। 28 नए एचएसएन कोड भी जुड़ेंगे। इससे भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली और बालोतरा के एमएसएमई उद्योगों को लाभ मिलेगा।
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भीलवाड़ा

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Arvind Rao

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Updated: 2 Nov 2026, 10:23 AM IST

bhilwara textile industry

राजस्थान में कपड़ा हब भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली और बालोतरा को मिलेगा लाभ (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Bhilwara Textile Industry: भीलवाड़ा: केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने देश के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत चौथे राउंड (राउंड-4) का एप्लीकेशन पोर्टल फिर से खोल दिया है। यह पोर्टल 1 नवंबर से प्रभावी हो गया है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने अब इस योजना को एमएसएमई और मध्यम स्तर की टेक्सटाइल इकाइयों के अनुकूल बनाते हुए निवेश और टर्नओवर की अनिवार्य सीमाओं में भारी कटौती की है। योजना को वर्ष 2033-34 तक के लिए विस्तारित किया गया है।

योजना के नए प्रावधानों को लेकर रविवार को वस्त्र मंत्रालय की ओर से देश के प्रमुख औद्योगिक संगठनों के साथ एक विशेष राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें मंत्रालय की संयुक्त सचिव मनीषा चटर्जी ने योजना के संशोधित प्रारूप की विस्तृत जानकारी दी। वेबिनार में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र औद्योगिक संगठन के रूप में 'मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' ने भाग लिया।

नए बदलाव: छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए राह आसान

नए प्रावधानों के तहत अब आवेदन के लिए न्यूनतम निवेश की सीमा घटाकर 50 करोड़ रुपए कर दी गई है। न्यूनतम टर्नओवर की अनिवार्यता को 200 करोड़ रुपए से घटाकर आधा यानी 100 करोड़ रुपए कर दिया गया है। योजना के तहत इंक्रीमेंटल टर्नओवर पर पहले वर्ष में 11 प्रतिशत इंसेंटिव देय होगा, जो प्रतिवर्ष एक-एक प्रतिशत कम होकर पांचवें वर्ष में 7 प्रतिशत रह जाएगा।

योजना में डेढ़ वर्ष की जेस्टेशन अवधि तय की गई है। पूर्व के फेज-1 से फेज-3 में किए गए निवेश को भी तय शर्तों के साथ मान्यता मिलेगी और पुराने आवेदक नए फेज में माइग्रेट हो सकेंगे। टेक्सटाइल सेक्टर की मांग पर 28 नए एचएसएन कोड शामिल किए जा रहे हैं, जिनकी गजट अधिसूचना अगले 7 से 10 दिनों में जारी होने की संभावना है। जिन इकाइयों ने पहले आवेदन किया है, वे बाद में भी इन नए कोड को अपने प्रोजेक्ट में जोड़ सकेंगी।

प्रदेश के टेक्सटाइल उद्योग में उत्साह

यह योजना मुख्य रूप से मैनमेड फाइबर (एमएमएफ) और टेक्निकल टेक्सटाइल सेक्टर के लिए तैयार की गई है। 21 सितंबर 2021 को शुरू हुई इस योजना की शर्तों में ढील से राजस्थान के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों, विशेष रूप से भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली और बालोतरा की इकाइयों को बड़ा संबल मिलेगा।

एमएसएमई सेक्टर को सीधे मिलेगा लाभ

मेवाड़ चैम्बर पिछले लंबे समय से यह मांग उठा रहा था कि पीएलआई योजना के निवेश और टर्नओवर के कड़े मापदंडों में ढील दी जाए और नए उत्पादों के एचएसएन कोड जोड़े जाएं। केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम निवेश सीमा 50 करोड़ रुपए और टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपए करना तथा 28 नए एचएसएन कोड शामिल करना बेहद स्वागतयोग्य कदम है। इससे राजस्थान के टेक्सटाइल उद्योग, विशेषकर एमएसएमई सेक्टर को सीधे लाभ मिलेगा और नए निवेश एवं रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
-आरके जैन, महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

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