50 प्रतिशत पुरानी किताबों के पुन: उपयोग के निर्देश, 27 मार्च तक देनी होगी रिपोर्ट प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिए हैं […]
प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों तथा कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों और आयकर दाता नहीं होने वाले अभिभावकों के बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई जाएं।
आदेश के अनुसार वितरण की पूरी प्रक्रिया शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और दो चरणों में पुस्तकों का आवंटन होगा। प्रथम चरण में चयनित जिलों में 5 मार्च से 25 मार्च तक वितरण किया जाएगा, जबकि शेष जिलों में 10 मार्च से 25 मार्च के बीच यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सभी जिलों को 27 मार्च 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट ई-मेल से भेजनी होगी।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कक्षा 6 एवं 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को गत सत्र में लौटाई गई पुस्तकों में से 50 प्रतिशत का पुन: उपयोग कराया जाएगा तथा 50 प्रतिशत नई पुस्तकें वितरित की जाएंगी। वहीं कक्षा 1 से 5 एवं 7 के विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत नई पुस्तकें दी जाएंगी।
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के माध्यम से जिला वितरण केंद्रों तक पुस्तकें पहुंचाई जाएंगी। वहां से ब्लॉक एवं नोडल केंद्रों के जरिए विद्यालयों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वितरण में किसी प्रकार की लापरवाही पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक योजना राज्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करना अनिवार्य होगा। इस निर्णय से लाखों विद्यार्थियों को नए सत्र की शुरुआत में ही पाठ्य सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।