भीलवाड़ा

Israel–Iran War Impact: इजराइल–ईरान युद्ध का असर राजस्थान तक, निर्यात उद्योग पर संकट के बादल, व्यापारियों की बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में अमरीका-इजराइल और ईरान के बीच जारी महायुद्ध की आंच अब टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा तक पहुंच गई है।

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Mar 05, 2026
Goods stuck at sea, restrictions in the air, halting industry progress.

भीलवाड़ा। पश्चिम एशिया में अमरीका-इजराइल और ईरान के बीच जारी महायुद्ध की आंच अब टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा तक पहुंच गई है। खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण जिले के करीब 600 करोड़ रुपए के वार्षिक कपड़ा निर्यात पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

बंदरगाहों और एयरपोर्ट का संचालन प्रभावित होने से निर्यात की रफ्तार थम गई है। जबकि पहले भेजे गए माल का भुगतान भी अटक गया है। इसे लेकर निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि सभी निर्यातक अभी युद्ध की स्थिति को देखने में लगे है यह कितने दिन चलेगा।

खाड़ी बाजार ठप, निर्यातकों की धड़कनें तेज

भीलवाड़ा से खाड़ी देशों यूएई, कुवेत, कतर, बहरीन, ओमान और सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर सिंथेटिक व पॉलिस्टर आधारित कपड़ों का निर्यात होता है। निर्यातकों के अनुसार औसतन 600 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का कारोबार इन देशों से जुड़ा है। युद्ध के कारण लॉजिस्टिक्स और बैंकिंग चैनल बाधित होने से निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

60 से 80 डॉलर पहुंचा क्रूड, बढ़ी लागत

युद्ध से पहले क्रूड ऑयल की कीमत करीब 60 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर पॉलिस्टर फाइबर व पेट्रो-केमिकल आधारित कच्चे माल पर पड़ा है। इसके कारण पॉलिस्टर फाइबर के दामों में लगातार तेजी आने लगी है। इससे यार्न (धागा) महंगा हो रहा है। पैकिंग में काम आने वाला प्लास्टिक भी महंगा हो रहा है। निर्यातकों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग सुस्त है। ऐसे में घरेलू बाजार में कम कीमत पर माल खपाने की नौबत आ सकती है।

भुगतान अटका, वर्किंग कैपिटल पर दबाव

पूर्व में खाड़ी देशों को भेजे गए माल का भुगतान भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। बैंकिंग लेन-देन प्रभावित होने से कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर दबाव बढ़ रहा है। यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो उत्पादन घटाने की स्थिति बन सकती है।

सरकार से राहत की मांग

औद्योगिक संगठनों ने केंद्र सरकार से निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज, ब्याज में रियायत, अतिरिक्त क्रेडिट लिमिट और वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराने की मांग की है। टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा, जो देश में सिंथेटिक सूटिंग का बड़ा हब माना जाता है, वैश्विक भू-राजनीतिक संकट के कारण असमंजस में है। उद्योग जगत की निगाहें अब हालात सामान्य होने पर टिकी हैं, ताकि उत्पादन और निर्यात की रफ्तार फिर पटरी पर लौट सके।

Updated on:
05 Mar 2026 10:30 am
Published on:
05 Mar 2026 09:28 am
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