29 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भीलवाड़ा डेयरी का बड़ा नवाचार, गुलाबपुरा में 82.5 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट्स

गुलाबपुरा में अत्याधुनिक पशु आहार प्लांट का ट्रायल, जिले में अब दो प्लांट, 1 रुपए किलो गोबर भी खरीदेगी डेयरी, बनेगी सीएनजी

2 min read
Google source verification
Bhilwara Dairy's big innovation, mega projects worth Rs 82.5 crore in Gulabpura

भीलवाड़ा डेयरी का बड़ा नवाचार, गुलाबपुरा में 82.5 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट्स

सहकारिता से समृद्धि और श्वेत क्रांति की दिशा में भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (भीलवाड़ा डेयरी) ने एक बड़ा कदम उठाया है। डेयरी ने गुलाबपुरा का खारी का लांबा स्थित 214 बीघा जमीन पर 82.51 करोड़ की लागत से दो बड़े प्रोजेक्ट स्थापित किए हैं। इनमें 63.04 करोड़ का कैटल फीड (पशु आहार) प्लांट और 19.47 करोड़ का बायोमेथनेशन (गोबर गैस) प्लांट शामिल है।

अत्याधुनिक कैटल फीड प्लांट में पशु आहार का उत्पादन ट्रायल के रूप में शुरू कर दिया गया है। इस प्लांट के शुरू होने के साथ ही भीलवाड़ा में पशु आहार के दो प्लांट हो गए हैं। जिले में आरसीडीएफ का लांबिया में पशु आहार प्लांट संचालित है। दूसरा प्लांट गुलाबपुरा में आकार ले चुका है। इसके अलावा डेयरी किसानों से 1 रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदेगी। इससे पशुपालकों को सालाना 27 हजार रुपए से अधिक की अतिरिक्त आय होगी।

63 करोड़ का कैटल फीड प्लांट

केंद्र सरकार की कम्पोनेंट बी योजना के तहत एनडीडीबी की कंसल्टेंसी से 63.04 करोड़ की लागत से यह पशु आहार प्लांट स्थापित किया है। वर्तमान में 150 टन प्रतिदिन क्षमता है। इसे भविष्य में 300 टन तक बढ़ाया जा सकेगा। ऑटोमैटिक और एनर्जी एफिशिएंट मशीनों वाले इस प्लांट में बायपास प्रोटीन, मिनरल मिक्सचर, प्रेगनेंसी फीड और काफ स्टार्टर का ट्रायल उत्पादन शुरू हो गया है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और दूध की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। जिले के पशुपालकों को उचित मूल्य पर पौष्टिक आहार मिलेगा।

गोबर से बनेगी बायो सीएनजी

प्रोजेक्ट साइट पर ही डीएमएफटी योजना के तहत 19.47 करोड़ से बायोमेथनेशन प्लांट 50 टन प्रतिदिन भी स्थापित किया जा रहा है। यह आधुनिक तकनीकों से लैस है। डेयरी पशुपालकों से गोबर खरीदेगी। यदि एक किसान के पास 5 गायें हैं और 75 किलो गोबर होता है, तो 1 रुपए किलो की दर से उसे रोजाना 75 रुपए और सालाना लगभग 27,375 रुपए की अतिरिक्त आय होगी। गोबर के एनारोबिक प्रोसेस से बायोगैस बनेगी। इसे अपग्रेड कर बायो सीएनजी में बदला जाएगा। इस गैस का उपयोग पशु आहार प्लांट के बॉयलर में होगा और शेष गैस औद्योगिक व वाहनों के ईंधन के रूप में बेची जाएगी। प्रोसेस के बाद बची बायो स्लरी से उच्च गुणवत्ता वाली सॉलिड और लिक्विड जैविक खाद बनेगी। यह डीएपी और यूरिया का सस्ता और बेहतर विकल्प होगी। इससे खेतों की उर्वरता बढ़ेगी और कृषि लागत घटेगी।

रोजगार, पर्यावरण और कार्बन क्रेडिट का लाभ

इन दोनों प्रोजेक्ट्स से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मीथेन गैस का उत्सर्जन रुकने से पर्यावरण प्रदूषण कम होगा। कार्बन क्रेडिट के तहत डेयरी को अतिरिक्त आय होगी। प्रोजेक्ट इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

प्रोजेक्ट्स एक नजर में

  • 82.51 करोड़ का निवेश
  • 214 बीघा जमीन खारी का लांबा गुलाबपुरा
  • 63.04 करोड़ का पशु आहार प्लांट
  • 150 टन प्रतिदिन ट्रायल उत्पादन
  • 19.47 करोड़ का बायोमेथनेशन प्लांट
  • 50 टन प्रतिदिन उत्पादन

बड़ी खबरें

View All

भीलवाड़ा

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग