खरीफ सीजन की तैयारियां तेज, कलक्टर ने ली टास्क फोर्स की बैठक
भीलवाड़ा जिले में आगामी खरीफ सीजन को लेकर कृषि विभाग और प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बांधों और जलाशयों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता के चलते इस बार मक्का और कपास की बुवाई का क्षेत्रफल (रकबा) बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही खाद की मांग में भी इजाफा होगा। किसानों को समय पर और बिना किसी परेशानी के खाद मिले, इसके लिए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने बुधवार को अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि उर्वरक वितरण में किसी भी तरह की कालाबाजारी या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित विक्रेता का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर कठोर कार्रवाई की जाए।
जिला कलक्टर संधू की अध्यक्षता में बुधवार को फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स धरती माता बचाओ अभियान और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जिला स्तरीय शिकायत एवं निगरानी समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विस्तार के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने आगामी खरीफ सीजन की कार्ययोजना पेश करते हुए बताया कि पानी की अच्छी उपलब्धता से मक्का और कपास का उत्पादन बढ़ेगा। इसी के अनुरूप खाद आपूर्ति का खाका तैयार कर लिया गया है।
जिले में खाद की निर्बाध आपूर्ति और पारदर्शिता के लिए उर्वरक निरीक्षकों की ओर से सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर जाकर वहां उपलब्ध भौतिक स्टॉक का पॉस मशीन में दर्ज आंकड़ों से सीधा मिलान किया जा रहा है। इस मॉनिटरिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उप-जिला स्तर पर भी उर्वरक निरीक्षकों की विशेष कमेटियों का गठन किया गया है।
बैठक में धरती माता बचाओ अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। संयुक्त निदेशक जैन ने बताया कि रासायनिक खादों के असंतुलित और अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकने के लिए जिले में यह अभियान जोरों पर चलाया जा रहा है। किसानों को कृषक गोष्ठियों के जरिए प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, हरी खाद के साथ-साथ बीजामृत और जीवामृत बनाने की विधि सिखाई जा रही है। इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए अब ग्राम पंचायत स्तर पर कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में जाकर विद्यार्थियों को भी धरती माता को बचाने और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं।