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टाइमिंग पर उठे सवाल: शिक्षा विभाग की ‘खानापूर्ति’ से भीषण गर्मी में परेशान हुई छात्राएं

तपती दोपहर में स्कूलों में फंसी 11वीं-12वीं की छात्राएं

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Questions raised about timing: Girls suffer in the scorching heat due to the Education Department's 'formalism'

टाइमिंग पर उठे सवाल: शिक्षा विभाग की 'खानापूर्ति' से भीषण गर्मी में परेशान हुई छात्राएं

भीलवाड़ा जिले में बुधवार को नारी शक्ति का सम्मान और उनके सशक्तीकरण के उद्देश्य से आयोजित मुख्यमंत्री का नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम बुधवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लचर प्रबंधन के कारण स्कूली छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बन गया। शिक्षा निदेशालय की ओर से मंगलवार देर रात जारी किए गए एक आदेश ने संस्था प्रधानों और कक्षा 11वीं व 12वीं की छात्राओं को भारी कशमकश में डाल दिया। सुबह 7:15 बजे की पारी वाले स्कूलों में बालिकाओं को शाम 4:30 बजे तक रोकना या तेज गर्मी में वापस बुलाना किसी चुनौती से कम नहीं था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह लाइव संबोधन बुधवार दोपहर 3:30 बजे शुरू हुआ और 4:30 बजे तक चला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित किया और इस दौरान कुछ बालिकाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया।

स्कूल का समय सुबह का, कार्यक्रम दोपहर का

वर्तमान में जिले में स्कूलों का संचालन ग्रीष्मकालीन समय के अनुसार सुबह 7:15 बजे से हो रहा है। ऐसे में दोपहर एक बजे तक स्कूल की छुट्टी हो जाती है। लेकिन, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के निर्देश पर अजमेर संभाग के संयुक्त निदेशक ने बुधवार के लिए आदेश जारी किया कि सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों की 11वीं और 12वीं की छात्राओं को दोपहर 3 बजे लाइव प्रसारण अनिवार्य रूप से दिखाया जाए। इसका समय दोपहर तीन बजे था, लेकिन छात्राएं सुबह 7:15 बजे स्कूल आई जो बालिकाओं को 4:30 बजे तक रोका गया।

जुगाड़ से जुटाई भीड़: प्रलोभन दिया, घर से वापस बुलाया

इस बेमेल टाइमिंग के कारण संस्था प्रधानों के पसीने छूट गए। सुबह से स्कूल में मौजूद छात्राओं को दोपहर 4:30 बजे तक भूखे-प्यासे रोकना नामुमकिन था। कई संस्था प्रधानों ने बीच का रास्ता निकालते हुए छात्राओं को दोपहर में घर भेज दिया और 3 बजे वापस स्कूल बुलाया।

पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज कराने की रही होड़

आदेश में स्पष्ट था कि कार्यक्रम के दौरान छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित कर इसके बाद सहभागिता को शाला दर्पण और पीएसपी पोर्टल पर दर्ज किया जाए। इसलिए स्कूलों में मुख्य फोकस बालिकाओं को कार्यक्रम दिखाने से ज्यादा उनके फोटो खींचकर आला अधिकारियों को मेल करने और पोर्टल पर उपस्थिति चढ़ाने पर रहा।