कृषि क्षेत्र में बड़ा आंदोलन: नियमों की जटिलता और उत्पीड़न के विरोध में एकजुट हुए व्यापारी, जिले की सभी तहसीलों में बंद रहेंगे प्रतिष्ठान
महाराष्ट्र से शुरू हुई खाद-बीज विक्रेताओं की बेमियादी हड़ताल की चिंगारी अब राजस्थान तक पहुंच गई है। राजस्थान एग्रीकल्चरल इनपुट डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार 27 अप्रेल को भीलवाड़ा जिले के सभी खाद-बीज विक्रेता एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे। इस देशव्यापी आंदोलन के समर्थन में जिले भर के कारोबारी अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखेंगे। खाद-बीज की दुकानें बंद रहने से कृषि कार्यों में जुटे किसानों की परेशानियां बढ़ना तय माना जा रहा है।
जिला संगठन के अध्यक्ष शांतिलाल पालीवाल ने बताया कि यह हड़ताल केवल व्यापारियों की नहीं, बल्कि किसानों से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को लेकर भी की जा रही है। वर्तमान कानूनी प्रक्रियाओं और विभागीय नियमों की जटिलताओं के कारण व्यापारियों के साथ-साथ किसानों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन की प्रमुख मांग है कि इन नियमों का तुरंत सरलीकरण किया जाए और जमीनी स्तर पर व्यावहारिक बदलाव लागू किए जाएं। भीलवाड़ा जिले में करीब 1200 प्रतिष्ठान है जो पूरी तरह से बंद रहेंगे। इससे लाखों रुपए का कारोबार प्रभावि होगा। शहरी क्षेत्र भीलवाड़ा शहर, मंगरोप तथा सुवाणा में करीब 35 दुकानें है। हालांकि कई किसान अभी खेतों में अपनी फसलें काटने में लगे होने से हड़ताल का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। पालीवाल ने बताया कि सरकार ने कई नियमों में बदलाव किया है। इसका असर मुख्य रूप से किसानों पर पड़ेगा। फिलहाल एक दिन की सांकेतिक हड़ताल है। सरकार ने मांगे नहीं मानी तो आगे उग्र आन्दोलन किया जाएगा।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए संगठन के उपाध्यक्ष नरेंद्र काबरा व राजेंद्र भाटी ने जिले के सभी डीलरों से सोमवार को स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखकर एकजुटता दिखाने की अपील की है। हड़ताल की रूपरेखा और रणनीति तय करने के लिए हुई बैठक में संगठन के कोषाध्यक्ष कौशल श्रीमाल, सचिव सुभाष चंद्र कटारिया, शांतिलाल शर्मा, गोवर्धन पाराशर, मुरलीधर सैनी व योगेश गहलोत समेत कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
हड़ताल के मुख्य बिंदु