आचार्य महाश्रमण का ठाणं सूत्र पर प्रवचनमाला
भीलवाड़ा।
आदित्य विहार तेरापंथ नगर में आचार्य महाश्रमण का ठाणं सूत्र पर आधारित प्रवचनमाला दूसरे दिन गुरुवार को भी जारी रही। आचार्य ने कहा कि कुछ बातों के प्रति कभी प्रमाद नहीं करना चाहिए। इन बातों के प्रति साधु समुदाय को सदैव जागरूक, सजग और सचेत रहना चाहिए। पहली बात है अश्रुत धर्म को सुनने का प्रयास होना चाहिए। जो पहले कभी नहीं सुना और जो नया हो उसे सम्यक रूप से सुनने का प्रयत्न हो। फिर सुने धर्म का मानसिक ग्रहण होना चाहिए। जो भी धर्म श्रवण किया, सीखा उसका चितारना होते रहना चाहिए ताकि ज्ञान सुरक्षित रह सके। संयम द्वारा नए कर्मों का बंधन न हो ऐसा प्रयास रहना चाहिए। साधु का आचार-विचार, व्यवहार संयमित रहे। तपस्या द्वारा नए कर्मों का बंध न हो और पुराने कर्मों की निर्जरा हो ऐसा प्रयास निरंतर रहे।
मुनि अनुशासन कुमार ने आचार्य से आठ की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। निर्मल कुमार खाब्या, रिंकी, मधु, हिना, सुजिता ने भी अठाई आदि तपस्या का प्रत्याख्यान किया। मुनि पारस कुमार ने विचार व्यक्त किए। समण संस्कृति संकाय लाडनूं और अभातेयुप के तत्वावधान में एक अगस्त से आचार्य की कृति तीन बातें ज्ञान की पर आधारित कार्यशाला के बैनर का अनावरण किया गया।