वैशाख माह में दान-पुण्य का विशेष महत्व
हिंदू कैलेंडर के दूसरे महीने वैशाख माह की शुरुआत हो चुकी है। वैशाख को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि ये महीना दान-पुण्य का है और इस महीने श्री हरि विष्णु की उपासना का भी विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस महीने अक्षय तृतीया सहित कई व्रत-त्योहार भी विशेष महत्व के रहेंगे। इसके अलावा अलग-अलग ग्रह द्वारा राशि और नक्षत्र परिवर्तन भी किया जाएगा। इसकी वजह से कई शुभ कार्य होंगे। वैशाख महीने को वैशाख मास और माधव मास भी कहा जाता है।
इसलिए खास है वैशाख
इस महीने भगवान हरि विष्णु के साथ ही साथ देवी की उपासना की जाती है। इस महीने भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का प्राकट्योत्सव भी मनाया जाता है। यह मास इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि साल भर में एक ही बार बांके बिहारी के चरणों के दर्शन वैशाख महीने में ही होते हैं। इसके साथ ही पवित्र सरोवर पवित्र नदियों विशेष कर गंगा नदी में स्नान दान पुण्य का महत्व होता है। वैशाख मास में ही ब्रह्माजी ने तिल का निर्माण किया था। इसलिए इस मास तिल का विशेष प्रयोग किया जाता है। पंडित अशोक व्यास का कहना है कि इस माह में भोजन, स्नान और दान-पुण्य में काले और सफेद तिलों का प्रयोग जरूर करना चाहिए।
बैसाख महीने में ये व्रत-त्योहार
13 अप्रेल से प्रारंभ हुए वैशाख महीने में 20 अप्रेल को कालाष्टमी, 24 अप्रेल को वरूथिनी एकादशी, 25 अप्रेल को प्रदोष व्रत, 26 अप्रेल को मासिक शिवरात्रि, 27 अप्रेल को वैशाख अमावस्या, 30 अप्रेल को अक्षय तृतीया (आखातीज), 1 मई को विनायक चतुर्थी, 3 मई को गंगा सप्तमी, 5 मई को सीता नवमी, 8 मई को मोहिनी एकादशी, 9 मई को प्रदोष व्रत, 11 मई को नरसिंह जयंती और 12 मई को बुद्ध पूर्णिमा (पीपल पूर्णिमा) का त्योहार मनाया जाएगा। 30 अप्रेल को अक्षय तृतीया को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में शादी समारोह की तैयारी शुरू हो गई है। कई जगह सामू्हिक विवाह सम्मेलन भी होंगे।