
Bhilwara Confectioner Verification: शादी-समारोहों में परोसे जाने वाले भोजन की शुद्धता सुनिश्चित करने और आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने जिलेभर में हलवाइयों, मुख्य रसोइयों और कैटरर्स के सत्यापन के लिए विशेष जांच अभियान शुरू करेगा। अब भीलवाड़ा जिले में होने वाले शादी-ब्याह, प्री-वेडिंग और अन्य सामाजिक आयोजनों में भोजन पकाने वाले कारोबारियों के फूड लाइसेंस की जांच होगी। विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना वैध लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के सामूहिक भोज तैयार करने पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत सीधे जेल और जुर्माने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। । इस अभियान के तहत विभाग का लक्ष्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचना और आयोजनों में सुरक्षित भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
अक्सर देखने में आता है कि शादी-समारोहों में बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करते समय घटिया दर्जे के तेल, मसाले, मावे और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल होता है। इसके साथ स्वच्छता के मानकों की अनदेखी से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर शुरू हो रही इस मुहिम का उद्देश्य किसी के रोजगार को प्रभावित करना नहीं, बल्कि आमजन को शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है।
नए नियमों के मुताबिक अब जिले के सभी छोटे-बड़े हलवाइयों और कैटरिंग संचालकों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सालाना 12 लाख रुपए से कम का कारोबार करने वालों को सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 12 लाख से अधिक का टर्नओवर रखने वाले व्यवसायियों के लिए फूड लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
विशेष अभियान को धरातल पर उतारने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष उड़नदस्तों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमों का गठन किया है। यह टीमें शहर समेत ग्रामीण क्षेत्र के मैरिज गार्डनों, कम्युनिटी हॉलों और होटलों का निरीक्षण करेंगी। मौके पर न सिर्फ लाइसेंस की जांच होगी, बल्कि मावा, पनीर, घी और तेल की गुणवत्ता को परख कर संदेह होने पर सैंपल लिए जाएंगे।
चिकित्सा विभाग ने चेतावनी दी कि अभियान के दौरान नियमों के उल्लंघन पर नरमी नहीं बरती जाएगी। कोई हलवाई बिना वैध लाइसेंस के व्यावसायिक रूप से खाना बनाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका काम मौके पर रुकवाने के साथ जुर्माना लगाया जाएगा।