कलक्टर ने कराई जांच, रिपोर्ट जयपुर भेजी
भीलवाड़ा।
जिला कलक्टर शिवप्रसाद एम नकाते ने कोरोना जांच के पीसीआर किट में गड़बड़ी सामने आने के बाद तीन हजार किट के भुगतान पर रोक लगा दी। इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन से पूछा है कि यह किट खरीदने के बाद इनको क्रॉस चेक क्यों नहीं किया? उन्होंने चिकित्सा विभाग को भेजी रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की गलती बताई है।
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली की कारवां कंपनी से कोरोना जांच के लिए 18.24 लाख रुपए में 9600 पीसीआर किट मंगवाए थे। इनसे ७ सितम्बर को जांच शुरू करने के साथ ही संक्रमण का प्रतिशत २० से बढ़कर ४२ प्रतिशत हो गया। किट की जांच तो ये खराब पाए गए। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन उपयोग में लिए तीन हजार किट के भुगतान की तैयारी में था। कलक्टर नकाते ने दखल देते भुगतान पर रोक लगा दी। कलक्टर ने मामले की जांच कराई। जिन अधिकारियों की लापरवाही रही, उनके नाम तय कर रिपोर्ट मुख्यालय भिजवा दी।
नकाते ने माना है कि पीसीआर किट भले आइसीएमआर से अधिकृत कंपनी से खरीदे हो, लेकिन इनमें कुछ किट की जांच के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए था। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इनकी क्रॉस जांच उचित नहीं समझी।
नकाते का कहना है कि जब किट जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज की जांच में खराब प्रमाणित हो चुके हैं तो इनका भुगतान नहीं किया जा सकता। नए सिरे से मंगवाए किट में से कुछ का इस्तेमाल करने से पहले अलग-अलग जगह से जांच कर क्वालिटी की क्रॉस जांच करा रहे हैं ताकि गड़बड़ी की आशंका न रहे।
जांच के बाद यह बात आई थी सामने
मेडिकल कॉलेज में संक्रमितों की संख्या अधिक आने पर लैब बंद कर दी। इसमें पाए १०४ संक्रमितों में से १०२ सैम्पल की जयपुर में फिर जांच कराई तो ३२ जने नेगेटिव मिले। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ७ से ९ सितम्बर तक घोषित ३९२ लोगों की न पुन: जांच कराई और न ही उनके बारे में निर्णय कर पाया था कि शेष २९० लोगों का क्या करना है।